फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Amritsar News ›   Mahatma Gandhi were disturbed by Jallianwala Bagh massacre in Amritsar

Mahatma Gandhi: जलियांवाला नरसंहार से विचलित थे गांधी जी...अमृतसर से उठी थी असहयोग की चिंगारी

Sun, 02 Oct 2022 04:26 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 02 Oct 2022 04:26 PM IST
सार

जलियांवाला बाग के नरसंहार के ठीक आठ माह बाद 27 दिसंबर 1919 को अमृतसर में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था। नरसंहार से आहत महात्मा गांधी ने इस अधिवेशन में गुलामी की जंजीरों में जकड़े देश को अंग्रेजी हुकूमत के चंगुल से मुक्त कराने का संकल्प लिया।

विज्ञापन
Mahatma Gandhi were disturbed by Jallianwala Bagh massacre in Amritsar
जलियांवाला बाग - फोटो : Twitter

विस्तार

अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर के आदेश पर खेली गई खून की होली ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को विचलित कर दिया था। इस घटना से गांधीजी बहुत दुखी थे। महात्मा गांधी के अंदर अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह भर दिया था। इसके बाद ही गांधी जी ने कांग्रेस के अधिवेशन में अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन की रणनीति तैयार की। यहीं से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन को धार मिली। 

विज्ञापन


जलियांवाला बाग के नरसंहार के ठीक आठ माह बाद 27 दिसंबर 1919 को अमृतसर में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था। नरसंहार से आहत महात्मा गांधी ने इस अधिवेशन में गुलामी की जंजीरों में जकड़े देश को अंग्रेजी हुकूमत के चंगुल से मुक्त कराने का संकल्प लिया। जन मानस में अपने भाषण से विद्रोह की ऐसी चिंगारी फूंकी, जिसने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी। 
विज्ञापन


अमृतसर में 26, 27 व 28 दिसंबर 1919 को कांग्रेस का अधिवेशन एचिसन में पार्क हुआ था। यह अब गोलबाग के नाम से जाना जाता है। अधिवेशन में कांग्रेस के बड़े नेता पंडित मोतीलाल नेहरू, महात्मा गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना, सैफुद्दीन किचलू, डॉ. हाफिज मोहम्मद बशीर, डॉ. सत्यपाल, लाल गिरधारी लाल, सेठ राधाकृष्ण, माहशा रत्न चंद, डॉ. हाफिज मोहम्मद बशीर, चौधरी बुग्गा मल आदि शामिल हुए थे। इसी अधिवेशन के दौरान अमृतसर की धरती पर महात्मा गांधी व अन्य नेताओं ने लोगों से सत्याग्रह व खिलाफत आंदोलन में भाग लेने की अपील की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


अंग्रेज सरकार रॉलेट एक्ट लागू कर भारतीयों से अपील, दलील और वकील का अधिकार छीन चुकी थी। महात्मा गांधी व पंडित मोतीलाल नेहरू ने अधिवेशन में अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह आंदोलन चलाने का निर्णय किया था। असहयोग आंदोलन का अंकुर इसी अधिवेशन में फूटा। कांग्रेस नेताओं ने जनता से आह्वान किया था कि वे पूरे देश में असहयोग आंदोलन चलाएं।

इस अधिवेशन में महात्मा गांधी बीमार हुए थे, उनके उपचार के लिए मुल्तानी मिट्टी मंगवाई गई। उनको मिट्टी की पट्टियां की गईं। अधिवेशन में जलियांवाला बाग घटना व रॉलेट एक्ट का जबरदस्त विरोध किया गया था। देशभक्तों को ट्रेनिंग देने के लिए स्वराज आश्रम स्थापित करने का प्रस्ताव पास किया गया। अमृतसर के चाटीविंड में स्वराज आश्रम की स्थापना की गई थी। यहां देशभक्तों को ट्रेनिंग दी जाती रही, आज इसका अस्तित्व भी शेष नहीं रहा। अंग्रेजों ने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी इस अमूल्य धरोहर को उजाड़ दिया था। इसके बाद शहरीकरण का क्रम शुरू हुआ तो स्वराज आश्रम कहीं खो गया। चाटीविंड में यह आश्रम किस जगह पर स्थित था, किसी को मालूम नहीं। यहां अब आवास और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं, जहां के लोगों को भी इस आश्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इतिहास गवाह है कि जलियांवाला बाग नरसंहार की घटना के बाद ही महात्मा गांधी ने विद्रोह का ध्वज उठाया था।

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने भी स्वतंत्रता संग्राम पर लिखी अपनी एक पुस्तक शहादत से स्वतंत्रता में यह दावा किया है कि जलियांवाला बाग नरसंहार ने गांधी जी को झकझोर दिया। गुहा की किताब ‘शहादत से स्वतंत्रता’ में लिखा है कि बापू ने 1919 से पहले कभी पंजाब का दौरा नहीं किया। 

इतिहास के प्रोफेसर रहे व पंजाब विधानसभा के पूर्व स्पीकर प्रो. दरबारी लाल का कहना है कि गुहा का अपनी पुस्तक में यह भी दावा है कि गांधी जी ने ब्रिटिश वायसरॉय से कहा कि जनरल डायर और तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर सर माइकल ओड्वायर को नरसंहार के लिए दोषी मानकर तुरंत बर्खास्त किया जाए, लेकिन वायसरॉय ने जनरल डायर के एक्शन पर खेद जताया और ओड्वायर को सर्टिफिकेट ऑफ करेक्टर दे दिया। इसमें उनकी मुक्तकंठ से सराहना की गई, तब गांधीजी ने आंदोलन चलाने का फैसला किया।


राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमाएं देश भर में सुशोभित हैं, लेकिन 1919 में वह अमृतसर आए थे और उन्होंने देशवासियों के मन में स्वतंत्रता प्राप्ति की अलख जगाई थी, इसलिए उनकी स्मृति में पंजाब सरकार ने ऐतिहासिक कंपनी बाग में उनकी प्रतिमा स्थापित की, ताकि इस महान व्यक्तित्व से आने वाली पीढ़ियां भी प्रेरणा लें। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed