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कारगिल के हीरो: अपने नवजात बेटे का चेहरा भी नहीं देख पाए थे लांस नायक हरपाल, आ गई थी मौत

Tue, 26 Jul 2022 09:47 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 26 Jul 2022 09:47 AM IST
सार

अमृतसर-बटाला के रास्ते में पड़ते अमृतसर से करीब 11 किलोमीटर दूर स्थित गांव जेठूवाल निवासी हरपाल सिंह अक्तूबर 1999 को शहीद हुए थे। इससे तीन माह पूर्व ही उनके घर दो बेटियों के बाद एक बेटे ने जन्म लिया था।

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Lance Naik Harpal of Amritsar was martyred in Kargil before seeing face of his newborn son
लांस नायक हरपाल सिंह - फोटो : फाइल

विस्तार

अमृतसर को लांस नायक हरपाल सिंह पर हमेशा नाज रहेगा। कारगिल युद्ध में देश के लिए बलिदान हुए इस बेटे ने अद्भुत बहादुरी का परिचय दिया। गोलियों से छलनी होने के बावजूद दुश्मनों से लोहा लेता रहा। कई दुश्मनों को मौत के घाट उतारकर वीरगति पाई। परिजनों को बेटे की शहादत पर गर्व है लेकिन इस बात का मलाल भी है कि हरपाल अपने मासूम बेटे का चेहरा देखे बिना दुनिया से विदा हो गए। 

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हरपाल सिंह की पत्नी दविंदर कौर ने बताया कि हरपाल को अपनी बेटियां बेहद प्यारी थीं। बेटे का जन्म हुआ तो उन्होंने छुट्टी के लिए आवेदन किया। छुट्टी मंजूर भी हो गई लेकिन युद्ध पर जाने के आदेश हुए तो हरपाल ने फोन पर कहा कि अब तो लड़ाई जीतकर ही बेटे का मुंह देखूंगा। मगर अफसोस वह आ नहीं पाए। उनकी शहादत की खबर आई। घायल होने के बावजूद वे दुश्मनों को ललकारते रहे। युद्धभूमि में उन्होंने पाकिस्तान के कई सैनिकों को मौत के घाट उतारा। 

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1999 में वीरगति को प्राप्त हुए थे हरपाल सिंह

अमृतसर-बटाला के रास्ते में पड़ते अमृतसर से करीब 11 किलोमीटर दूर स्थित गांव जेठूवाल निवासी हरपाल सिंह अक्तूबर 1999 को शहीद हुए थे। इससे तीन माह पूर्व ही उनके घर दो बेटियों के बाद एक बेटे ने जन्म लिया था। बेटे के पैदा होने पर कारगिल से फोन पर हरपाल ने बताया था कि वह युद्ध खत्म होने के बाद लौटेंगे, लेकिन यह इंतजार कभी खत्म ही नहीं हुआ।

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बड़ी बेटी ऑस्ट्रेलिया में हासिल कर रही है शिक्षा

दविंदर कौर ने बताया कि सरकार ने साल 2002 में शहीद हरपाल सिंह के नाम पर झब्बाल में गैस एजेंसी दी थी। इससे परिवार का भरण पोषण शुरू हुआ। बड़ी बेटी सुखबीर कौर ने बीटेक की और आजकल ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा हासिल कर रही है। छोटी बेटी ने बीए करने के बाद लवली यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई पूरी की है। बच्चों में सबसे छोटे बेटे बिक्रमजीत सिंह है।  

हरपाल के पिता बीएसएफ में दे चुके हैं सेवाएं

हरपाल सिंह के पिता गुरदयाल सिंह बार्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) सेवाएं दे चुके हैं। अकेला बेटा होने पर जब हरपाल सिंह की सेना में नौकरी लगी तो वह परिवार की देखभाल के लिए बीएसएफ छोड़कर घर आ गए। बेटे के शहीद होने के बाद गांव में ट्रस्ट बनाया और हर साल खेल मेले करवाते रहे। ससुर का देहांत होने पर अब यह जिम्मेदारी भी दविंदर कौर के कंधों पर आ गई है। इस मेले को गांववासियों के सहयोग से हर साल आयोजित किया जाता है। 

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