जलियांवाला बाग मैमोरियल सिविल अस्पताल में हुई जच्चा-बच्चा की मौत मामले की जांच शुरू हो गई है। मंगलवार को जिला परिवार भलाई अधिकारी डॉ. रबिंदर सिंह सेठी ने मामले की हर पहलू की बारीकी से जांच की। उन्होंने सिविल अस्पताल की गायनी डॉक्टरों को भी जांच में शामिल किया। सारे घटनाक्रम के हर पक्ष को कलमबंद किया गया।
चार अगस्त को प्रसव पीड़ा से तड़प रही 22 वर्षीय दलजीत कौर को सिविल अस्पताल लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि वह छह घंटे तक दर्द से तड़पती रही, लेकिन गायनी डॉक्टरों ने उसे हाथ तक नहीं लगाया। परिणामस्वरूप दलजीत और उसकी कोख में पल रहे शिशु की जान चली गई। स्थानीय स्तर पर इस मामले को दबाने का प्रयास किया गया। गायनी डाक्टरों की लापरवाही को भी उजागर नहीं किया गया, पर मीडिया में मामला सामने आने पर सेहत विभाग के सचिव अनुराग अग्रवाल ने जांच के आदेश दिए। मंगलवार को सिविल सर्जन कार्यालय में जिला परिवार भलाई अधिकारी डॉ. रबिंदर सिंह सेठी, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. मदन मोहन व सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. अरुण शर्मा पर आधारित जांच कमेटी ने पड़ताल शुरू की। इसमें सिविल अस्पताल की गायनी डॉक्टरों को भी शामिल किया गया। एक गायनी डॉक्टर ने तर्क दिया कि वह शाम छह बजे अस्पताल पहुंची थी, तब तक जच्चा-बच्चा की मौत हो चुकी थी। गायनी डॉक्टरों के बयान कलमबंद कर जांच टीम ने उन्हें अस्पताल भेज दिया, लेकिन आगामी वीरवार को दोबारा जांच में शामिल होने को कहा गया है। जांच अधिकारी डॉ. रबिंदर सिंह सेठी ने कहा कि वह घटना की हर पहलू से पड़ताल कर रहे हैं।