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151 भारतीय मछुआरे भारत लौटे
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Mon, 26 May 2014 09:51 PM IST
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पाकिस्तान सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के मौके पर पाकिस्तान की जेलों में बंद 151 भारतीय मछुआरों को रिहा कर दिया। मछुआरे सोमवार देर शाम अटारी-वाघा सड़क सीमा के रास्ते भारत पहुंचे।
मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने आए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने रविवार को ही भारतीय मछुआरों को रिहा करने के हुक्म दिए थे। कराची की मलीर जेल से रिहा हो कर आए सभी मछुआरे गुजरात के रहने वाले हैं। पाकिस्तान की तरफ से इन मछुआरों की 57 किश्तियों को भी वापस करने का दावा किया गया है।
कई माह से पाकिस्तान की जेलों में बंद कैदियों ने अटारी वाघा सीमा पर पहुंचे तो उनके चेहरे पर वतन लौटने की खुशी थी।
इन मछुआरों ने बताया कि उन को कराची से एसी बसों द्वारा अटारी-वाघा सीमा पर लाया गया था। पाकिस्तान की जेल में 17 महीने की सजा काट कर वतन लौटे गुजरात निवासी विजय ने कहा है कि जब भारत में नरेंद्र मोदी की पार्टी को बहुमत मिलने और मोदी सरकार बनने की खबर उन्होंने सुनी थी तो उनमें रिहाई की आशा जागी थी। आज उनकी यह आशा पूरी हुई है। विजय ने कहा कि उनकी रिहाई पहले शिनाख्त न होने के कारण रुक गई थी। आज भी पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में 229 भारतीय मछुआरे बंद हैं और सरकार को उन की रिहाई के लिए भी तुरंत कदम उठाने चाहिए।
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रिहा होकर वतन लौटे कैदी टप्पू ने कहा कि समुद्र में कोई निशानी न होने के कारण वह पाकिस्तान पहुंच जाते हैं। दोनों सरकारों को चाहिए कि कोई निशानी रखी जाए या फिर मौके पर ही जांच करके दोनों देशों के पकड़ेे जाते मछुआरों को रिहा कर दिया जाए। पकड़े जाने और सार्थक सिस्टम समुद्री सीमा के न होने के कारण दोनों देशों के मछुआरों को कई-कई माह जेलों में सजाएं काटनी पड़ती है। रिहा हुए मछुआरों ने कहा कि हमारे साथ अच्छा व्यवहार अपनाया गया और अब हम घर जाकर परिवार से मिलना चाहते हैं।
कैदी धीरू ने कहा कि आज का दिन जहां भारत के इतिहास में अहम है वहीं यह दिन हमारी जिंदगी के लिए भी अहम है। इन सभी कैदियों का गुजरात सरकार के अधिकारियों ने अटारी सरहद पर जोरदार स्वागत किया। गुजराल फिशरी विभाग के कई कर्मचारी और अधिकारी इन कैदियों को लेने के लिए अटारी सीमा पर पहुंचे थे।
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मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने आए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने रविवार को ही भारतीय मछुआरों को रिहा करने के हुक्म दिए थे। कराची की मलीर जेल से रिहा हो कर आए सभी मछुआरे गुजरात के रहने वाले हैं। पाकिस्तान की तरफ से इन मछुआरों की 57 किश्तियों को भी वापस करने का दावा किया गया है।
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कई माह से पाकिस्तान की जेलों में बंद कैदियों ने अटारी वाघा सीमा पर पहुंचे तो उनके चेहरे पर वतन लौटने की खुशी थी।
इन मछुआरों ने बताया कि उन को कराची से एसी बसों द्वारा अटारी-वाघा सीमा पर लाया गया था। पाकिस्तान की जेल में 17 महीने की सजा काट कर वतन लौटे गुजरात निवासी विजय ने कहा है कि जब भारत में नरेंद्र मोदी की पार्टी को बहुमत मिलने और मोदी सरकार बनने की खबर उन्होंने सुनी थी तो उनमें रिहाई की आशा जागी थी। आज उनकी यह आशा पूरी हुई है। विजय ने कहा कि उनकी रिहाई पहले शिनाख्त न होने के कारण रुक गई थी। आज भी पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में 229 भारतीय मछुआरे बंद हैं और सरकार को उन की रिहाई के लिए भी तुरंत कदम उठाने चाहिए।
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रिहा होकर वतन लौटे कैदी टप्पू ने कहा कि समुद्र में कोई निशानी न होने के कारण वह पाकिस्तान पहुंच जाते हैं। दोनों सरकारों को चाहिए कि कोई निशानी रखी जाए या फिर मौके पर ही जांच करके दोनों देशों के पकड़ेे जाते मछुआरों को रिहा कर दिया जाए। पकड़े जाने और सार्थक सिस्टम समुद्री सीमा के न होने के कारण दोनों देशों के मछुआरों को कई-कई माह जेलों में सजाएं काटनी पड़ती है। रिहा हुए मछुआरों ने कहा कि हमारे साथ अच्छा व्यवहार अपनाया गया और अब हम घर जाकर परिवार से मिलना चाहते हैं।
कैदी धीरू ने कहा कि आज का दिन जहां भारत के इतिहास में अहम है वहीं यह दिन हमारी जिंदगी के लिए भी अहम है। इन सभी कैदियों का गुजरात सरकार के अधिकारियों ने अटारी सरहद पर जोरदार स्वागत किया। गुजराल फिशरी विभाग के कई कर्मचारी और अधिकारी इन कैदियों को लेने के लिए अटारी सीमा पर पहुंचे थे।