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ज्ञानी रघबीर सिंह की हेड ग्रंथी पद से छुट्टी: SGPC कार्यकारिणी की बैठक में एक्शन, प्रधान धामी ने बताई वजह
Thu, 26 Feb 2026 05:55 PM IST
Ankesh Kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: Ankesh Kumar
Updated Thu, 26 Feb 2026 05:55 PM IST
सार
श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार व श्री हरमंदिर साहिब के मौजूदा हेड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह को पद से हटा दिया गया है। उन्हें पद से हटाते हुए नौकरी से सेवामुक्त किया गया है।
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ज्ञानी रघबीर सिंह
- फोटो : संवाद
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विस्तार
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की कार्यकारिणी ने श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह को सेवा से रिटायर करने का कड़ा फैसला लिया है। यह निर्णय 72 घंटे के नोटिस के बावजूद एसजीपीसी प्रबंधन पर लगाए आरोपों के समर्थन में कोई सबूत पेश न करने और सर्विस नियमों की अनदेखी करने के आधार पर लिया गया।
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बैठक के बाद एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह ने हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमेटी पर गंभीर आरोप लगाकर संस्था को बदनाम किया। 19 फरवरी के फैसले के तहत उन्हें सबूत देने का अवसर दिया गया था, लेकिन तय समय में कोई प्रमाण नहीं सौंपा गया। धामी ने आरोप लगाया कि प्रेस में दिए गए बयान से न सिर्फ प्रबंधन की छवि धूमिल हुई, बल्कि मुख्य ग्रंथी पद की गरिमा को भी ठेस पहुंची। धामी ने यह भी कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह सुबह-शाम की सेवा में अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं निभा रहे थे, जो पद की मर्यादा के विपरीत है। इन सभी बिंदुओं पर गंभीर मंथन के बाद कार्यकारिणी ने उन्हें सेवा से रिटायर करने का निर्णय लिया।
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संपत्ति और फाइनेंशियल एसेट्स में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का दावा
धामी ने स्पष्ट किया कि कुछ लोग संपत्तियों को लेकर भ्रम फैला रहे हैं, जबकि 2020-21 से 2025-26 के दौरान एसजीपीसी ने करीब 111 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदी है। इसी अवधि में गुरुद्वारों का बजट 577 करोड़ से बढ़कर 1120 करोड़ रुपये हुआ।
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उन्होंने बताया कि विभिन्न गुरुद्वारों की डिपॉजिट कैपिटल में 600 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। एसजीपीसी की एफडीआर में 273.60 करोड़ और धर्म प्रचार कमेटी में 121.45 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। एजुकेशनल संस्थानों के लिए 182 करोड़ रुपये अलग से दिए गए। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शताब्दी के लिए 5 करोड़ रुपये रिजर्व रखे गए थे, जिसमें संगत के सहयोग से अतिरिक्त 7 लाख रुपये और जुड़े।
मिलते रहेंगे सेवा लाभ
ज्ञानी रघबीर सिंह को समय पूर्व सेवा से रिटायर किए जाने के बावजूद उन्हें रिटायरमेंट से जुड़े सभी वित्तीय लाभ मिलते रहेंगे। यदि उन्हें बर्खास्त किया जाता, तो वे किसी भी प्रकार के सेवा या पेंशन लाभ के हकदार नहीं होते और जुर्माना भी लगाया जा सकता था।