बाढ़ की दोहरी मार: अमृतसर के सीमांत गांव बाउली मौल्ली के लोग घरों में कैद, कच्चे मकान ढहे; फसल नष्ट
ग्रामीण दलजीत सिंह, निरभै सिंह और जसवंत सिंह बताते हैं कि बाढ़ का पानी गांव में करीब चार से साढ़े चार फीट तक भर चुका है। पानी के दबाव से कई कच्चे घरों की छतें गिर गई हैं। महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक परेशान हैं।
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अमृतसर में सरहद पर बसा गांव बाउली मौल्ली एक बार फिर आपदा और संकट का सामना कर रहा है। यह वही सीमांत गांव है, जिसने अतीत में भारत-पाकिस्तान युद्धों के दौरान दुश्मन की गतिविधियों का डटकर मुकाबला किया था।
सरहदी चौकसी और बहादुरी के लिए पहचाने जाने वाले इस गांव के लोग आज रावी दरिया में आई बाढ़ से जूझ रहे हैं। चारों ओर फैले पानी ने गांव की जिंदगी को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
बाउली मौल्ली इस समय दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर रावी का उफनता पानी और दूसरी ओर रोजमर्रा की जरूरतों की कमी। गांव के लोगों ने हमेशा सरहद की सुरक्षा में योगदान दिया है। अब उनकी पुकार है कि सरकार और समाज उनकी मदद के लिए आगे आएं। जब तक गांव से बाढ़ का पानी पूरी तरह नहीं उतरता, तब तक यहां राहत और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर मौजूदगी बेहद जरूरी है।
चार फीट तक पानी, कच्चे मकान धराशायी
ग्रामीण दलजीत सिंह, निरभै सिंह और जसवंत सिंह बताते हैं कि बाढ़ का पानी गांव में करीब चार से साढ़े चार फीट तक भर चुका है। पानी के दबाव से कई कच्चे घरों की छतें गिर गई हैं। महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक परेशान हैं। गांव के कुछ परिवार जिला प्रशासन और एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे राहत शिविरों में पहुंचे हैं, जहां उन्हें भोजन और दवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं लेकिन शिविरों में जगह सीमित है।
बीमारियों का बढ़ता खतरा
चारों ओर फैले गंदे पानी के कारण गांव में चर्म रोग, दस्त, बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। पशुओं में भी बीमारी फैल रही है। किसानों का कहना है कि इस बार की धान और अन्य खरीफ फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। खेतों में खड़ा चारा भी पानी में डूब गया है। किसानों को अब अगले सीजन तक इंतजार करना पड़ेगा। खेती पर ही निर्भर अधिकतर परिवारों की कमर बुरी तरह टूट चुकी है।
प्रशासन और राहत टीमें सक्रिय
हालात बिगड़ने के बाद जिला प्रशासन, बीएसएफ, सेना और एनडीआरएफ की टीमें गांव में पहुंच गई हैं। राहत व बचाव अभियान लगातार जारी है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
डीसी और एसएसपी का दौरा
अमृतसर की डीसी साक्षी साहनी और एसएसपी मनिंदर सिंह ने बाउली मौल्ली गांव का दौरा कर हालात का जायज़ा लिया। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन हर संभव मदद देगा। एसएसपी ने पुलिस बल को निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी तरह की कमी न रहने पाए। कई एनजीओ और स्वयंसेवी संगठन भी गांव में सक्रिय हैं।
ग्रामीणों की अपील और मदद चाहिए
गांव के लोगों का कहना है कि प्रशासन ने अब तक राहत तो दी है, लेकिन हालात बेहद गंभीर हैं। अब भी कई परिवार घरों में फंसे हैं। पशुओं के लिए चारा और किसानों के लिए मुआवजा तत्काल जरूरी है। ग्रामीणों ने सरकार से अपील की है कि जल्द आर्थिक मदद, मवेशियों के लिए चारा और क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत के लिए विशेष पैकेज जारी किया जाए।
सीमांत गांव की बहादुरी, पर जरूरत है सुरक्षा की
बाउली मौल्ली सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि सीमा का प्रहरी भी है। इसने कई बार युद्ध और तनाव के दौर में दुश्मन का सामना किया है। आज जब यह गांव प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है, तो सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि यहां के लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने में मदद की जाए।