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दमदमी टकसाल के प्रवक्ता प्रो. सरचांद श्री अकाल तख्त पर तलब
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श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने दमदमी टकसाल के प्रवक्ता व सिख स्टूडेंट फेडरेशन के नेता रहे प्रो. सरचांद सिंह को 22 अगस्त को श्री अकाल तख्त पर तलब किया है। प्रो. सरचांद को सुच्चा सिंह लंगाह को अमृत छकाने के मामले में निभाई गई भूमिका पर स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया गया है। जत्थेदार ने इस मामले की जांच के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद उक्त फैसला लिया है। जत्थेदार के निजी सहायक जसपाल सिंह ने प्रो. सरचांद सिंह को पत्र लिखा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि इस मामले में उनका स्पष्टीकरण संतुष्टिजनक न रहा तो उनके विरुद्ध पंथक मर्यादाओं के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं प्रो. सरचांद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह श्री अकाल तख्त को समर्पित हैं और उनके हर आदेश को स्वीकार करेंगे। 22 अगस्त को वह इस मामले में अपना स्पष्टीकरण लेकर श्री अकाल तख्त साहिब में एक विनम्र सिख की भांति पेश होंगे।
लंगाह को अमृत छकाने के मामले में ऐतिहासिक गुरुद्वारा बारठ साहिब व गुरुद्वारा बुर्ज साहिब के दो मैनेजरों व तीन प्रचारकों की भूमिका भी सामने आई है। श्री अकाल तख्त ने इन सबके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने के लिए एसजीपीसी को आदेश जारी किए हैं।
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कुछ दिन पहले गुरदासपुर के गांव गुरदास नंगल स्थित गुरुद्वारा गढ़ी बंदा सिंह बहादुर में निहंग मुखिया बाबा तरसेम सिंह की अगुवाई में श्री अकाल तख्त द्वारा सिख पंथ से निष्कासित सुच्चा सिंह लंगाह को अमृत छकाकर उसे 21 दिन तक गुरुद्वारा साहिब में झाड़ू लगाने की सजा सुनाई थी। लंगाह को धार्मिक सजा सुनाकर उसे पंथ में दोबारा वापस लाने के लिए इस प्रकार के प्रयास किए गए थे। तरसेम सिंह ने ऐसा कर जहां श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती दी थी, वहीं जो कार्य उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं था उसको करने का असफल प्रयास किया था। लंगाह को अमृत छकाने की भूमिका बनाने के लिए एसजीपीसी के सीनियर सदस्य गुरिंदर पाल सिंह गोरा व एसजीपीसी की धर्म प्रचार कमेटी के पूर्व सदस्य रतन सिंह जफरवाल पर भी आरोप लगे थे। अमृत छकाने के एक दिन बाद ही एसजीपीसी के दोनों सदस्यों व तरसेम सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में हाजिर होकर माफी मांगी थी।
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वहीं प्रो. सरचांद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह श्री अकाल तख्त को समर्पित हैं और उनके हर आदेश को स्वीकार करेंगे। 22 अगस्त को वह इस मामले में अपना स्पष्टीकरण लेकर श्री अकाल तख्त साहिब में एक विनम्र सिख की भांति पेश होंगे।
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लंगाह को अमृत छकाने के मामले में ऐतिहासिक गुरुद्वारा बारठ साहिब व गुरुद्वारा बुर्ज साहिब के दो मैनेजरों व तीन प्रचारकों की भूमिका भी सामने आई है। श्री अकाल तख्त ने इन सबके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने के लिए एसजीपीसी को आदेश जारी किए हैं।
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कुछ दिन पहले गुरदासपुर के गांव गुरदास नंगल स्थित गुरुद्वारा गढ़ी बंदा सिंह बहादुर में निहंग मुखिया बाबा तरसेम सिंह की अगुवाई में श्री अकाल तख्त द्वारा सिख पंथ से निष्कासित सुच्चा सिंह लंगाह को अमृत छकाकर उसे 21 दिन तक गुरुद्वारा साहिब में झाड़ू लगाने की सजा सुनाई थी। लंगाह को धार्मिक सजा सुनाकर उसे पंथ में दोबारा वापस लाने के लिए इस प्रकार के प्रयास किए गए थे। तरसेम सिंह ने ऐसा कर जहां श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती दी थी, वहीं जो कार्य उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं था उसको करने का असफल प्रयास किया था। लंगाह को अमृत छकाने की भूमिका बनाने के लिए एसजीपीसी के सीनियर सदस्य गुरिंदर पाल सिंह गोरा व एसजीपीसी की धर्म प्रचार कमेटी के पूर्व सदस्य रतन सिंह जफरवाल पर भी आरोप लगे थे। अमृत छकाने के एक दिन बाद ही एसजीपीसी के दोनों सदस्यों व तरसेम सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में हाजिर होकर माफी मांगी थी।