{"_id":"6217c06b0465d5774a522ba6","slug":"cultivation-of-banana-apple-and-saffron-will-be-possible-in-punjab-prof-sandhu-amritsar-news-pkl443001259","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब में संभव होगी केले, सेब और केसर की खेती : प्रो. संधू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब में संभव होगी केले, सेब और केसर की खेती : प्रो. संधू
विज्ञापन
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के उप कुलपति प्रो. जसपाल सिंह संधू ने कहा कि आज के दौर में खेतीबाड़ी, पर्यावरण और आर्थिक संतुलन कायम करने की जरूरत है। पारंपरिक खेतीबाड़ी को आधुनिक विधि से करने के लिए यूनिवर्सिटी आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसके लिए उच्च स्तरीय शिक्षा अभियान (रूसा-2) के तहत खेतीबाड़ी शोध और नवीनता केंद्र की स्थापना कर दी गई है। यह केंद्र पंजाब के किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें पारंपरिक फसलों के चक्कर से गैर पारंपरिक खेती की तरफ लेकर जाएगा। पंजाब में सेब, केला और केसर की खेती की जा सकेगी। इस केंद्र में खेतीबाड़ी को पेश आ रही मुश्किलों के समाधान निकालने में काम शुरू हो गया है।
जीएनडीयू के वीसी प्रो. संधू ने कहा कि इसके साथ ही खेतीबाड़ी के क्षेत्र में विकास के नए रास्ते खुलेंगे। खेतीबाड़ी के पर्यावरण और आर्थिक तौर पर मजबूत मॉडलों की स्थापना के लिए खेतीबाड़ी, भोजन प्रणालियों तथा पर्यावरण में शोध और आउटरीच शिक्षा को इकट्ठा किया जाएगा। इस केंद्र ने प्रयोगात्मक फार्म पर उच्च कीमती गैर पारंपरिक फसलें, जैसे कम ठंडे सेब, केले और केसर की खेती के लिए एग्रोटेक्नोलॉजी का सफलतापूर्वक विकास किया है।
विज्ञापन
औषधीय पौधों की हो रही बिजाई
कई औषधीय पौधे, जिनका दवाओं के क्षेत्र में बहुत महत्व है, जैसे विथानिया सोमनीफेरा, टाइलोफोरा इंडिका और रोडिओला इंब्रिक्टा प्लांट टिशू कल्चर का प्रयोग करते हुए बीजे जा रहे हैं। खेतीबाड़ी और सहायक क्षेत्रों में नवीनतम शोधों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र ने विश्व की शीर्ष यूनिवर्सिटियों और संस्थाओं के साथ संपर्क स्थापित किया है। हाल ही में केंद्र ने कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड नेचुरल रिसोर्सेज, नेशनल चुंग हंसिंग यूनिवर्सिटी ताईवान के साथ समझौता किया है। कारनेल यूनिवर्सिटी, अमेरिका खेतीबाड़ी के क्षेत्र में अध्यापन, ट्रेनिंग और नवीनतम शोधों में सहयोग को उत्साहित करने के लिए पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी (पीएयू), इंडिग्राम लैबज फाउंडेशन (आईएलएफ)- टीबीआई नई दिल्ली के साथ सांझ स्थापित की है।
फोटो-
विज्ञापन
इसके लिए उच्च स्तरीय शिक्षा अभियान (रूसा-2) के तहत खेतीबाड़ी शोध और नवीनता केंद्र की स्थापना कर दी गई है। यह केंद्र पंजाब के किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें पारंपरिक फसलों के चक्कर से गैर पारंपरिक खेती की तरफ लेकर जाएगा। पंजाब में सेब, केला और केसर की खेती की जा सकेगी। इस केंद्र में खेतीबाड़ी को पेश आ रही मुश्किलों के समाधान निकालने में काम शुरू हो गया है।
विज्ञापन
जीएनडीयू के वीसी प्रो. संधू ने कहा कि इसके साथ ही खेतीबाड़ी के क्षेत्र में विकास के नए रास्ते खुलेंगे। खेतीबाड़ी के पर्यावरण और आर्थिक तौर पर मजबूत मॉडलों की स्थापना के लिए खेतीबाड़ी, भोजन प्रणालियों तथा पर्यावरण में शोध और आउटरीच शिक्षा को इकट्ठा किया जाएगा। इस केंद्र ने प्रयोगात्मक फार्म पर उच्च कीमती गैर पारंपरिक फसलें, जैसे कम ठंडे सेब, केले और केसर की खेती के लिए एग्रोटेक्नोलॉजी का सफलतापूर्वक विकास किया है।
विज्ञापन
औषधीय पौधों की हो रही बिजाई
कई औषधीय पौधे, जिनका दवाओं के क्षेत्र में बहुत महत्व है, जैसे विथानिया सोमनीफेरा, टाइलोफोरा इंडिका और रोडिओला इंब्रिक्टा प्लांट टिशू कल्चर का प्रयोग करते हुए बीजे जा रहे हैं। खेतीबाड़ी और सहायक क्षेत्रों में नवीनतम शोधों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र ने विश्व की शीर्ष यूनिवर्सिटियों और संस्थाओं के साथ संपर्क स्थापित किया है। हाल ही में केंद्र ने कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड नेचुरल रिसोर्सेज, नेशनल चुंग हंसिंग यूनिवर्सिटी ताईवान के साथ समझौता किया है। कारनेल यूनिवर्सिटी, अमेरिका खेतीबाड़ी के क्षेत्र में अध्यापन, ट्रेनिंग और नवीनतम शोधों में सहयोग को उत्साहित करने के लिए पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी (पीएयू), इंडिग्राम लैबज फाउंडेशन (आईएलएफ)- टीबीआई नई दिल्ली के साथ सांझ स्थापित की है।
फोटो-