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-पश्चिम बंगाल की महिला से जबरदस्ती शादी और बंधुआ मजदूरी करवाने का मामला-
Updated Sat, 25 Aug 2018 10:33 PM IST
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जबरदस्ती शादी रचाने वाला पति गिरफ्तार
बंधक बनाई गई महिला को नहीं दिया मुक्ति प्रमाण पत्र और सहायता राशि
पीड़िता नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बांडेड लेबर की टीम के साथ सिलीगुड़ी रवाना
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट। पश्चिम बंगाल की महिला को नौकरी और कमाई का झांसा देकर गांव जनियाल में जबरन शादी रचाने और बंधुआ मजदूरी कराने वाले भाई-बहन पर थाना नरोट जैमल सिंह ने मामला दर्ज किया था। महिला के बयान दर्ज करने के बाद पति राकेश कुमार को गांव जनियाल से गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि आरोपी की बहन फरार है। दोनों भाई-बहन के खिलाफ अगवा करने और दुष्कर्म सहित 7 धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं पीड़िता को दिल्ली से आए नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बांडेड लेबर की टीम के साथ सिलीगुड़ी रवाना कर दिया है। कमेटी कन्वीनर निर्मल गोराना का कहना है कि प्रशासन ने अपना काम भी पूरा नहीं किया। महिला को आरोपी की गिरफ्त से छुड़ाने के बाद उसे लावारिस हालत में छोड़ दिया। बंधुआ मजदूर को छुड़वाने के बाद स्टेट गवर्नमेंट का कर्तव्य है कि पीड़ित को उसकी मजदूरी, मुक्ति प्रमाण पत्र और 20 हजार रुपये सहायता राशि देकर उसे पुलिस प्रोटेक्शन में उसके निवास पर भेजा जाए। उन्होंने कहा कि अगर जिला प्रशासन इस मामले में सहयोग करता है तो ठीक नहीं तो हाईकोर्ट में एप्लीकेशन लगाई जाएगी।
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बंधक बनाई गई महिला को नहीं दिया मुक्ति प्रमाण पत्र और सहायता राशि
पीड़िता नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बांडेड लेबर की टीम के साथ सिलीगुड़ी रवाना
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट। पश्चिम बंगाल की महिला को नौकरी और कमाई का झांसा देकर गांव जनियाल में जबरन शादी रचाने और बंधुआ मजदूरी कराने वाले भाई-बहन पर थाना नरोट जैमल सिंह ने मामला दर्ज किया था। महिला के बयान दर्ज करने के बाद पति राकेश कुमार को गांव जनियाल से गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि आरोपी की बहन फरार है। दोनों भाई-बहन के खिलाफ अगवा करने और दुष्कर्म सहित 7 धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं पीड़िता को दिल्ली से आए नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बांडेड लेबर की टीम के साथ सिलीगुड़ी रवाना कर दिया है। कमेटी कन्वीनर निर्मल गोराना का कहना है कि प्रशासन ने अपना काम भी पूरा नहीं किया। महिला को आरोपी की गिरफ्त से छुड़ाने के बाद उसे लावारिस हालत में छोड़ दिया। बंधुआ मजदूर को छुड़वाने के बाद स्टेट गवर्नमेंट का कर्तव्य है कि पीड़ित को उसकी मजदूरी, मुक्ति प्रमाण पत्र और 20 हजार रुपये सहायता राशि देकर उसे पुलिस प्रोटेक्शन में उसके निवास पर भेजा जाए। उन्होंने कहा कि अगर जिला प्रशासन इस मामले में सहयोग करता है तो ठीक नहीं तो हाईकोर्ट में एप्लीकेशन लगाई जाएगी।