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कांग्रेस को एक और झटका: कैप्टन के करीबी लाली मजीठिया आम आदमी पार्टी में शामिल
Sat, 01 Jan 2022 06:54 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 01 Jan 2022 06:54 PM IST
सार
लाली मजीठिया ने कांग्रेस से नाराजगी जताते हुए दो दिन पहले ही पनग्रेन के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन तब पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बारे में वे कुछ नहीं बोले थे।
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आम आदमी पार्टी में शामिल हुए लाली मजीठिया।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। अकाली दल के गढ़ माने जाने वाले मजीठा में कांग्रेस को जिंदा रखने वाले लाली मजीठिया ने पार्टी को अलविदा कहते हुए आम आदमी पार्टी को ज्वाइन कर लिया। आप आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को अपने अमृतसर दौरे के दौरान एक बंद कमरे में लाली मजीठिया के गले में सिरोपा डाल कर अपनी पार्टी में शामिल करवाया। सुखजिंदर राज सिंह लाली मजीठिया शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ तीन विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इस दौरान उन्हें तीनों चुनावों में शिकस्त मिली थी।
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गौरतलब है कि लाली मजीठिया कैप्टन अमरिंदर सिंह के बहुत नजदीकी थे। कैप्टन ने ही उन्हें कुछ समय पहले ही पंजाब स्टेट ग्रेन्स प्रोक्योरमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड का चेयरमैन लगाया था। वह पार्टी द्वारा शिअद के बिक्रम मजीठिया को सरंक्षण देने से नाराज थे। इसके साथ ही वह ड्रग्स रैकेट और पंजाब में हो रही बेअदबी के मामलों में पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई न किए जाने से पार्टी के अंदर घुटन महसूस कर रहे थे।
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लाली मजीठिया ने कांग्रेस से नाराजगी जताते हुए दो दिन पहले ही पनग्रेन के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन तब पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बारे में वे कुछ नहीं बोले थे। लाली मजीठिया कांग्रेस की ओर से बिक्रम मजीठिया को सरंक्षण देने पर बहुत नाराज थे। मजीठिया के गायब होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा पर सवाल उठाए थे, कि इतनी भारी सुरक्षा के बावजूद बिक्रम मजीठिया को पुलिस क्यों नहीं पकड़ पाई।
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लाली मजीठिया मजीठा विधानसभा हलके से 2007 और 2017 में कांग्रेस के टिकट पर बिक्रम मजीठिया के खिलाफ चुनाव लड़े थे। वर्ष 2012 में हुए विस चुनावों में उन्होंने बतौर निर्दलीय उम्मीद्वार चुनाव लड़ा था। लाली मजीठिया के आप में शामिल होने के बाद कांग्रेस की मजीठा में मुश्किलें बढ़ जाएंगी। क्योंकि जब कोई भी कांग्रेसी मजीठिया के खिलाफ अपना मुंह नहीं खोलता था, तो लाली मजीठिया ने उस विधानसभा हलके में कांग्रेस का अस्तित्व बनाए रखा था।