{"_id":"64271b02feb9a36c4f05adc6","slug":"calling-sarbat-khalsa-at-the-behest-of-amritpal-would-not-be-correct-bhai-mohkam-singh-amritsar-news-c-16-1-102953-2023-03-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमृतपाल के कहने पर सरबत खालसा बुलाना सही नहीं होगा: भाई मोहकम सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमृतपाल के कहने पर सरबत खालसा बुलाना सही नहीं होगा: भाई मोहकम सिंह
Fri, 31 Mar 2023 11:10 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
Updated Fri, 31 Mar 2023 11:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। दमदमी टकसाल के पूर्व प्रवक्ता व संयुक्त अकाली दल के पूर्व प्रमुख भाई मोहकम सिंह ने कहा कि सिख कौम में सरबत खालसा (धार्मिक सम्मेलन) हमेशा किसी पंथक मुद्दे पर बुलाया जाता है। पंथ के सामने अगर गंभीर मुद्दे हों और उनका हल निकलता न दिखाई न दे रहा हो या अलग-अलग नेता मुद्दों पर अलग-अलग विचार रख रहे हों, ऐसी स्थिति में सरबत खालसा बुलाया जाता है। मोहकम सिंह खुद सरबत खालसा के आयोजकों में से एक रहे हैं। उनका कहना है कि इसके लिए कम से कम तीन महीने का समय चाहिए होता है, क्योंकि सरबत खालसा में दुनिया भर से सिखों के प्रतिनिधियों को शामिल होकर अंतिम फैसला लेना होता है। इस समय कोई भी बड़ा पंथक मुद्दा नहीं है। न ही यह बताया जा रहा है कि किस पंथक मुद्दे पर सरबत खालसा होगा।
भाई मोहकम सिंह कहते हैं कि पहले वर्ष 1986 में सरबत खालसा बुलाया गया था, तब अकाल तख्त के नव निर्माण, राजीव लोंगोवाल समझौता, जेलों में बंद सिख आदि मुख्य मुद्दे थे। इसके बाद वर्ष 2015 में सरबत खालसा हुआ। इस दौरान डेरा मुखी को एसजीपीसी की ओर से नियुक्त जत्थेदारों की ओर से माफी दिए जाने, श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के संबंध में किसी को भी दोषी न तय किए जाने, गलत ढंग से एफआईआर दर्ज होने जैसे मुद्दे थे। अब अमृतपाल वीडियो जारी करके श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को सरबत खालसा बुलाने के लिए कह रहा है, लेकिन कोई मुद्दा नहीं बताया जा रहा। ऐसे हालात में सरबत खालसा कैसे बुलाया जा सकता है। सरबत खालसा बुलाना कोई आसान काम नहीं होता। किसी के निजी विचारों से सरबत खालसा नहीं बुलाया जा सकता। वर्ष 2015 में सरबत खालसा के जत्थेदार बनाए गए जगतार सिंह हवारा से भी सलाह की जानी जरूरी है।
विज्ञापन
अमृतसर। दमदमी टकसाल के पूर्व प्रवक्ता व संयुक्त अकाली दल के पूर्व प्रमुख भाई मोहकम सिंह ने कहा कि सिख कौम में सरबत खालसा (धार्मिक सम्मेलन) हमेशा किसी पंथक मुद्दे पर बुलाया जाता है। पंथ के सामने अगर गंभीर मुद्दे हों और उनका हल निकलता न दिखाई न दे रहा हो या अलग-अलग नेता मुद्दों पर अलग-अलग विचार रख रहे हों, ऐसी स्थिति में सरबत खालसा बुलाया जाता है। मोहकम सिंह खुद सरबत खालसा के आयोजकों में से एक रहे हैं। उनका कहना है कि इसके लिए कम से कम तीन महीने का समय चाहिए होता है, क्योंकि सरबत खालसा में दुनिया भर से सिखों के प्रतिनिधियों को शामिल होकर अंतिम फैसला लेना होता है। इस समय कोई भी बड़ा पंथक मुद्दा नहीं है। न ही यह बताया जा रहा है कि किस पंथक मुद्दे पर सरबत खालसा होगा।
भाई मोहकम सिंह कहते हैं कि पहले वर्ष 1986 में सरबत खालसा बुलाया गया था, तब अकाल तख्त के नव निर्माण, राजीव लोंगोवाल समझौता, जेलों में बंद सिख आदि मुख्य मुद्दे थे। इसके बाद वर्ष 2015 में सरबत खालसा हुआ। इस दौरान डेरा मुखी को एसजीपीसी की ओर से नियुक्त जत्थेदारों की ओर से माफी दिए जाने, श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के संबंध में किसी को भी दोषी न तय किए जाने, गलत ढंग से एफआईआर दर्ज होने जैसे मुद्दे थे। अब अमृतपाल वीडियो जारी करके श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को सरबत खालसा बुलाने के लिए कह रहा है, लेकिन कोई मुद्दा नहीं बताया जा रहा। ऐसे हालात में सरबत खालसा कैसे बुलाया जा सकता है। सरबत खालसा बुलाना कोई आसान काम नहीं होता। किसी के निजी विचारों से सरबत खालसा नहीं बुलाया जा सकता। वर्ष 2015 में सरबत खालसा के जत्थेदार बनाए गए जगतार सिंह हवारा से भी सलाह की जानी जरूरी है।
विज्ञापन