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सचखंड के मुख्य भवन में बताशे का प्रसाद बांटने पर रोक
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अमृतसर। सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन में सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को रूमाला साहिब चढ़ाने व अरदास करने के बाद वहां उपस्थित ग्रंथी सिंहों द्वारा संगत को दिए जाने वाले बताशे के प्रसाद का वितरण बंद कर दिया गया है। वर्ष 2004 में बीबी जागीर ने एसजीपीसी के अध्यक्ष पद की सेवा संभालने पर बताशे के प्रसाद पर पाबंदी लगा दी थी। संगत के विरोध के बाद एसजीपीसी के तत्कालीन अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने दोबारा बताशे के प्रसाद की सेवा शुरू कर दी थी।
बीबी जागीर कौर का कहना है कि गुरु घरों में कड़ाह प्रसाद की देग चढ़ाने की मर्यादा है। कड़ाह प्रसाद ही संगत को वितरित किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि एसजीपीसी के तत्कालीन अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पिन्नी प्रसाद शुरू किया था। देश-विदेश की संगत डाक के माध्यम से पिन्नी प्रसाद मंगवाती है।
जिन कमरों में बनते थे बताशे, वहां लगा ताला
सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में सदियों से बांटने वाले बताशे का प्रसाद श्री अकाल तख्त साहिब परिसर स्थित बरामदे के दो कमरों में तैयार होता था। एसजीपीसी का एक कर्मचारी इन बताशों को तैयार करता था। इस कर्मचारी के बुजुर्ग भी बताशे बनाने की सेवा करते थे। प्रतिदिन एक क्विंटल चीनी के बताशे एक दिन में तैयार किए जाते थे। यह बताशे संगत को बांटे जाते थे। गुरु पर्वों व एतिहासिक दिन के अवसर पर दो क्विंटल चीनी से बताशे तैयार किए जाते थे। सचखंड के मुख्य भवन में सेवा करने वाले कर्मचारी इसी कमरे से एक सुनहरी बाल्टी में बताशे लेकर मुख्य भवन तक पहुंचते थे। बीबी जागीर के आदेश के बाद इन कमरों पर ताला लगा दिया गया है।
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बीबी जागीर कौर का कहना है कि गुरु घरों में कड़ाह प्रसाद की देग चढ़ाने की मर्यादा है। कड़ाह प्रसाद ही संगत को वितरित किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि एसजीपीसी के तत्कालीन अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पिन्नी प्रसाद शुरू किया था। देश-विदेश की संगत डाक के माध्यम से पिन्नी प्रसाद मंगवाती है।
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जिन कमरों में बनते थे बताशे, वहां लगा ताला
सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में सदियों से बांटने वाले बताशे का प्रसाद श्री अकाल तख्त साहिब परिसर स्थित बरामदे के दो कमरों में तैयार होता था। एसजीपीसी का एक कर्मचारी इन बताशों को तैयार करता था। इस कर्मचारी के बुजुर्ग भी बताशे बनाने की सेवा करते थे। प्रतिदिन एक क्विंटल चीनी के बताशे एक दिन में तैयार किए जाते थे। यह बताशे संगत को बांटे जाते थे। गुरु पर्वों व एतिहासिक दिन के अवसर पर दो क्विंटल चीनी से बताशे तैयार किए जाते थे। सचखंड के मुख्य भवन में सेवा करने वाले कर्मचारी इसी कमरे से एक सुनहरी बाल्टी में बताशे लेकर मुख्य भवन तक पहुंचते थे। बीबी जागीर के आदेश के बाद इन कमरों पर ताला लगा दिया गया है।
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