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जनता के पैसे से प्राइवेट अस्पतालों में मंहगा इलाज क्योंः प्रो. चावला
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Wed, 04 Nov 2015 09:53 PM IST
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पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रोफेसर लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि देश और प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में जनता के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत कम हैं।
मेडिकल कॉलेजों के अंतर्गत चल रहे अस्पतालों में भी दिल, दिमाग, गुर्दे और कैंसर जैसी बीमारियों का कोई इलाज नहीं। इसके लिए जनता को प्राइवेट अस्पतालों में ही लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं और जो नहीं खर्च कर सकता, वह बेचारा तड़प-तड़प कर मरने को मजबूर होता है।
प्रो. चावला ने कहा कि जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक, मंत्री आदि किसी भी बीमारी का इलाज देश विदेश के किसी प्राइवेट अस्पताल में करवा कर उसका सारा खर्च सरकार से लेते हैं।
ऐसे में जनता को आवाज उठानी होगी कि जन प्रतिनिधि सरकारी अस्पताल में को निशुल्क इलाज वहां मिलता है। इसके बाद भी वह सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं कराते हैं। लोगों को आवाज उठानी होगी कि मंत्री, विधायक प्राइवेट अस्पतालों में जनता के पैसे से इलाज करवाने न जाएं।
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जन प्रतिनिधियों को अपनी कमाई से ही प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाना चाहिए। हो सकता है कि इस नियम से सरकारी अस्पतालों में भी वे सब सुविधाएं आम जनता को मिल जाएं जो इस समय नहीं हैं।
सरकारों को यह सोचना होगा कि जो सुविधा सरकारी अस्पताल में जनता को नहीं दे सकते, वही सुविधाएं जनता के पैसे से उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में लेने का कोई अधिकार नहीं है।
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मेडिकल कॉलेजों के अंतर्गत चल रहे अस्पतालों में भी दिल, दिमाग, गुर्दे और कैंसर जैसी बीमारियों का कोई इलाज नहीं। इसके लिए जनता को प्राइवेट अस्पतालों में ही लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं और जो नहीं खर्च कर सकता, वह बेचारा तड़प-तड़प कर मरने को मजबूर होता है।
प्रो. चावला ने कहा कि जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक, मंत्री आदि किसी भी बीमारी का इलाज देश विदेश के किसी प्राइवेट अस्पताल में करवा कर उसका सारा खर्च सरकार से लेते हैं।
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ऐसे में जनता को आवाज उठानी होगी कि जन प्रतिनिधि सरकारी अस्पताल में को निशुल्क इलाज वहां मिलता है। इसके बाद भी वह सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं कराते हैं। लोगों को आवाज उठानी होगी कि मंत्री, विधायक प्राइवेट अस्पतालों में जनता के पैसे से इलाज करवाने न जाएं।
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जन प्रतिनिधियों को अपनी कमाई से ही प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाना चाहिए। हो सकता है कि इस नियम से सरकारी अस्पतालों में भी वे सब सुविधाएं आम जनता को मिल जाएं जो इस समय नहीं हैं।
सरकारों को यह सोचना होगा कि जो सुविधा सरकारी अस्पताल में जनता को नहीं दे सकते, वही सुविधाएं जनता के पैसे से उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में लेने का कोई अधिकार नहीं है।