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भारत में बढ़ रहा है कुपोषण : प्रो. चावला
Amritsar
Updated Fri, 22 Feb 2013 05:30 AM IST
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अमृतसर। पंजाब की पूर्व केबिनेट मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने कहा कि आज भारत में लाखों बच्चे कुपोषण के कारण मर रहे हैं। भूख और बेकारी भी है। सर्दी तथा गर्मी से भी लोगों की मौत हो रही है। ऐसे भयानक संकट के समय हम लोग पूजा के नाम पर मंदिरों में प्रतिदिन कितना दूध-दही, फल, मिठाइयां चढ़ा देते हैं। अभिषेक तथा स्नान के नाम पर यह सारा दूध-दही नालियों में बह जाता है। यदि यही दूध बच्चों के मुंह तक पहुंचे तो मृत्यु दर कम हो सकती है।
पूर्व मंत्री ने चारों पीठों के शंकराचार्योें को एक पत्र भी भेजा है। प्रो. चावला ने स्पष्ट किया कि क्या ऐसा नहीं हो सकता कि चारों शंकराचार्य सारे हिंदू समाज को निर्देश दें और ठाकुर पूजा में अर्पित यह दूध-दही उन बच्चों के मुंह में जाए जो अभाव ग्रस्त हैं, वंचित हैं और जिनका बचपन सीधा बुढ़ापे में पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि अपने समाज में देवी पूजा होती है। वर्ष में दो बार कन्या पूजन भी किया जाता है, लेकिन इस प्रकार कन्या भ्रूण हत्या अपने देश में हो रही है, महिलाओं का शारीरिक शोषण और अपमान किया जा रहा है। उसके लिए भी शंकराचार्य की ओर से समाज को कोई दिशा मिले, इसकी सभी प्रतीक्षा कर रहे हैं। आप यह अवश्य ही जानते होंगे कि कुछ मंदिरों में महिलाओं को किसी देवता विशेष की पूजा करने से रोका जाता है। आश्चर्य है कि मां अंजनि के पुत्र और सीता जी के परम भक्त हनुमान की पूजा से भी देश के कुछ प्रांतों में पुजारी-पुरोहित महिलाओं को रोकते हैं। हनुमान जी बल-बुद्धि-विद्या देते हैं, वह केवल पुरुषों के लिए तो नहीं।
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पूर्व मंत्री ने चारों पीठों के शंकराचार्योें को एक पत्र भी भेजा है। प्रो. चावला ने स्पष्ट किया कि क्या ऐसा नहीं हो सकता कि चारों शंकराचार्य सारे हिंदू समाज को निर्देश दें और ठाकुर पूजा में अर्पित यह दूध-दही उन बच्चों के मुंह में जाए जो अभाव ग्रस्त हैं, वंचित हैं और जिनका बचपन सीधा बुढ़ापे में पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि अपने समाज में देवी पूजा होती है। वर्ष में दो बार कन्या पूजन भी किया जाता है, लेकिन इस प्रकार कन्या भ्रूण हत्या अपने देश में हो रही है, महिलाओं का शारीरिक शोषण और अपमान किया जा रहा है। उसके लिए भी शंकराचार्य की ओर से समाज को कोई दिशा मिले, इसकी सभी प्रतीक्षा कर रहे हैं। आप यह अवश्य ही जानते होंगे कि कुछ मंदिरों में महिलाओं को किसी देवता विशेष की पूजा करने से रोका जाता है। आश्चर्य है कि मां अंजनि के पुत्र और सीता जी के परम भक्त हनुमान की पूजा से भी देश के कुछ प्रांतों में पुजारी-पुरोहित महिलाओं को रोकते हैं। हनुमान जी बल-बुद्धि-विद्या देते हैं, वह केवल पुरुषों के लिए तो नहीं।
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