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पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवी कक्षा की परीक्षा में प्रथम स्थान पर रहने वाली श्रिया महाजन केवल मैरिट में आने की आशा लगाए बैठी
Updated Tue, 08 May 2018 10:32 PM IST
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स्पोर्ट्स कोटे की टॉपर श्रिया को थी मेरिट की आश
लेक्चरार बनने की ख्वाहिश, बड़ी बहन भावना को मानती है आदर्श
मनन सैनी
गुरदासपुर।
पंजाब शिक्षा बोर्ड की दसवी की परीक्षा में स्पोर्ट्स कोटे की टापर श्रिया महाजन को खुद को यह अंदाजा न था कि वह सूबे में प्रथम स्थान प्राप्त करेगी। वह तो केवल मेरिट में आने की आशा लगाए बैठी थी। सूबे में प्रथम रहकर उसने अपने स्कूल व माता-पिता और जिले का नाम रोशन किया।
दसवीं कक्षा में 650 में से 641 अंक प्राप्त करने वाली श्रिया एक गली में स्थित बाल विद्या मंदिर स्कूल में शिक्षा प्राप्त करती है । श्रिया महाजन पुत्री नरेश महाजन निवासी गुरदासपुर ने बताया कि उसने जब चाहा तब पढ़ लिया और पढ़ाई का अपने मन पर कभी बोझ नहीं डाला। इसके बावजूद मैं प्रथम स्थान पर आ गई, जिससे मेरी खुशी का कोई ढिकाना नहीं है। मैं तो मेरिट में आने की आशा लगाए बैठी थी
श्रेया के पिता नरेश महाजन कपड़ा व्यापारी खुद ग्रेजुएट है व माता अंडर ग्रेजुएट है। पिता नरेश महाजन ने बताया कि उनकी दो ही बेटियां है और उन्होंने कभी भी उन्हें किसी काम से नही रोका। वह खुद उनके लिए स्कूल की किताबें लाते और उन्होंने कभी उन पर दबाव नहीं बनाया कि बड़े होकर यह बनो वह बनो।
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श्रिया बताती है कि उसकी बड़ी बहन भावना उसे हमेशा शिक्षा के लिए उत्साहित करती थी। भावना एमएससी, बी.एड हैं और आर्मी स्कूल तिब्बड़ी कैंट में नौकरी करती हैं। श्रिया बहन भावना को ही अपना आदर्श मानती है। श्रिया महाजन आगे नान मैडीकल विषय को प्राथमिकता दे रही है औप शिक्षा पूरी करने के बाद लेक्चरार बन कर शिक्षा क्षेत्र में उतरना चाहती है। अपनी सफलता के लिए वह स्कूल की प्रिंसिपल रितू महाजन, समूह स्टाफ व परिवार को श्रेय देती है।
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लेक्चरार बनने की ख्वाहिश, बड़ी बहन भावना को मानती है आदर्श
मनन सैनी
गुरदासपुर।
पंजाब शिक्षा बोर्ड की दसवी की परीक्षा में स्पोर्ट्स कोटे की टापर श्रिया महाजन को खुद को यह अंदाजा न था कि वह सूबे में प्रथम स्थान प्राप्त करेगी। वह तो केवल मेरिट में आने की आशा लगाए बैठी थी। सूबे में प्रथम रहकर उसने अपने स्कूल व माता-पिता और जिले का नाम रोशन किया।
दसवीं कक्षा में 650 में से 641 अंक प्राप्त करने वाली श्रिया एक गली में स्थित बाल विद्या मंदिर स्कूल में शिक्षा प्राप्त करती है । श्रिया महाजन पुत्री नरेश महाजन निवासी गुरदासपुर ने बताया कि उसने जब चाहा तब पढ़ लिया और पढ़ाई का अपने मन पर कभी बोझ नहीं डाला। इसके बावजूद मैं प्रथम स्थान पर आ गई, जिससे मेरी खुशी का कोई ढिकाना नहीं है। मैं तो मेरिट में आने की आशा लगाए बैठी थी
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श्रेया के पिता नरेश महाजन कपड़ा व्यापारी खुद ग्रेजुएट है व माता अंडर ग्रेजुएट है। पिता नरेश महाजन ने बताया कि उनकी दो ही बेटियां है और उन्होंने कभी भी उन्हें किसी काम से नही रोका। वह खुद उनके लिए स्कूल की किताबें लाते और उन्होंने कभी उन पर दबाव नहीं बनाया कि बड़े होकर यह बनो वह बनो।
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श्रिया बताती है कि उसकी बड़ी बहन भावना उसे हमेशा शिक्षा के लिए उत्साहित करती थी। भावना एमएससी, बी.एड हैं और आर्मी स्कूल तिब्बड़ी कैंट में नौकरी करती हैं। श्रिया बहन भावना को ही अपना आदर्श मानती है। श्रिया महाजन आगे नान मैडीकल विषय को प्राथमिकता दे रही है औप शिक्षा पूरी करने के बाद लेक्चरार बन कर शिक्षा क्षेत्र में उतरना चाहती है। अपनी सफलता के लिए वह स्कूल की प्रिंसिपल रितू महाजन, समूह स्टाफ व परिवार को श्रेय देती है।