19 फरवरी 2019 का दिन दुनिया में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में देश का ही नहीं बल्कि दुनिया पहला डीजल से विद्युत में परिवर्तित इंजन का निर्माण हुआ है। इस इंजन का देश में निर्माण होना भी मेक इन इंडिया योजना को नए आयाम पर ले जाता है। इस ट्विन रेल इंजन की खास बातें जानें आगे की स्लाइड्स में...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दुनिया का पहला डीजल से विद्युत में परिवर्तित 10000 अश्व शक्ति क्षमता का ट्विन रेल इंजन (कनवर्जन लोको) राष्ट्र को समर्पित किया। डीजल रेल इंजन कारखाना में आयोजित लोकार्पण समारोह में प्रधानमंत्री ने इस उच्च अश्व शक्ति के मालवाहक डब्ल्यूएजीसी-3 रेल इंजन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। लोकार्पण से पूर्व माननीय प्रधानमंत्री ने रेल इंजन के बारे में लगाई गई प्रदर्शनी, वीडियो फिल्म व रेल इंजन कैब को देखा।
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twin rail engine
- फोटो : amar ujala
इंजन का लोकार्पण करने के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ली गई फोटो भी प्रदर्शनी में लगाई गई थी जिसको पीएम काफी देर तक अपलक देखते रहे। प्रधानमंत्री ने विद्युत रेल इंजन के निर्माण में लगे डीएलडब्ल्यू, सीएलडब्ल्यू व आरडीएसओ के कर्मचारियों तथा अधिकारियों को बधाई दी और उत्साह बढ़ाया। कहा कि आप लोगों ने बहुत अच्छा काम किया। सभी के साथ ग्रुप फोटो भी कराया।
प्रधानमंत्री का स्वागत सदस्य कर्षण रेलवे बोर्ड घनश्याम सिंह व महाप्रबंधक डीरेका रश्मि गोयल ने किया।इस अवसर पर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रेल राज्य मंत्री एवं संचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय उपस्थित रहे। उप महाप्रबंधक नितिन मेहरोत्रा ने धन्यवाद दिया। सुबह 9:35 बजे पीएम का हेलीकॉप्टर डीरेका स्टेडियम में उतरा। 15 मिनट बाद 9:45 बजे काफिला कारखाना रवाना हुआ। पीएम 10:06 बजे वापस स्टेडियम लौटे और 10:11 बजे हेलीकॉप्टर बीएचयू के लिए उड़ गया।
कनवर्जन लोको से जुड़ी कुछ खास बातें : भारतीय रेल ने डीजल की बचत व पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए डीरेका ने विद्युत रेल इंजनों के निर्माण के साथ ही पुराने डीजल रेल इंजनों को भी विद्युत रेल इंजन में परिवर्तित करने का ऐतिहासिक कदम उठाया। 28 फरवरी को डीरेका ने 2600 अश्व शक्ति वाले पुराने डब्ल्यूडीजी3ए डीजल रेल इंजन को 5000 अश्व शक्तिविद्युत रेल इंजन में रूपांतरित कर डब्ल्यूएजीसी3 रेल इंजन की पहली इकाई का निर्माण किया। इससे ट्रैक्शन एचपी में 92 प्रतिशत की वृद्धि हुई।