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विश्व पुस्तक दिवस: आजादी की यादों को हृदय में संजोए हैं काशी के पुस्तकालय, इंटरनेट के दौर में भी अहमियत बरकरार

Sat, 23 Apr 2022 12:44 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 23 Apr 2022 12:44 PM IST
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World Book and Copyright Day 2022 libraries of Kashi varanasi cherished memories of freedom books importance remains in internet era
चेतगंज स्थित सरस्वती सदन वाचनालय - फोटो : अमर उजाला

ये किताबों की दुनिया है, सबसे अच्छे दोस्त का अहसास कराते हुए। समय, भाषा की बाध्यता से परे, हजारों-लाखों साल को कुछ पन्नों में समेटे हुए। अब दौर इंटरनेट का है, खासकर मोबाइल क्रांति के बाद काफी कुछ बदल गया है। ऐसे में सवाल भी उठे कि क्या किताबों का दौर खत्म होने वाला है।





आज विश्व पुस्तक दिवस पर किताबों की दुनिया में ताकझांक की गई तो पता चला कि इनकी अहमियत हमेशा बरकरार रहेगी।  1927 में बना चेतगंज स्थित सरस्वती सदन वाचनालय व पुस्तकालय बनारस का दूसरा सबसे पुराना पुस्तकालय है। इसे पूर्व सांसद शंकर प्रसाद जायसवाल व जय बाबू के प्रयास से शुरू किया गया था। ये चंद्रशेखर आजाद समेत कई क्रांतिकारियों का ठिकाना हुआ करता था। आजाद यहां गुप्त बैठकें किया करते थे। चंद्रशेखर आजाद द्वारा कराई जाने वाले कबड्डी प्रतियोगिता की रसीद आज भी पुस्तकालय में सहेज कर रखी गई है। 

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चंद्रशेखर आजाद कबड्डी प्रतियोगिता की रसीद - फोटो : अमर उजाला

खेदन लाल ने सरस्वती सदन पुस्तकालय की इमारत दान में दी थी। ट्रस्ट के अध्यक्ष लाल बाबू जायसवाल बताते हैं कि लाइब्रेरी में आजादी के समय की कई पांडुलिपियां आज भी सहेजकर रखी गई हैं। वर्तमान में विज्ञान, राजशास्त्र, साहित्य, सहित कई अन्य विषयों की 17 हजार पुस्तकें हैं। कई पुस्तकें ऐसी हैं जिनके कुछ पन्ने और बाइंडिंग खराब हो चुके हैं।

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पुस्तकालय अध्यक्ष कंचन सिंह परिहार - फोटो : अमर उजाला
इंटरनेट के दौर में भी काशी की एक लाइब्रेरी है, जहां पढ़ने वाले लोगों की लाइन लगती है। लोग घंटों इंतजार करते हैं। एलटी कॉलेज परिसर स्थित 1958 में तैयार राजकीय पुस्तकालय में आजादी के पहले से लेकर आधुनिक काल तक की पुस्तकें हैं। पुस्तकालय अध्यक्ष कंचन सिंह परिहार बताते हैं कि यहां साहित्य, कहानी, नोबेल, प्रतियोगी परीक्षा के अलावा इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित अन्य कई विषयों की 40 हजार पुस्तकें हैं। यहां 1500 सदस्य हैं।

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चेतगंज स्थित सरस्वती सदन वाचनालय - फोटो : अमर उजाला
पुस्तकालय में ज्यादा से ज्यादा बच्चे आकर पढ़ सकें इसके लिए डीएम कौशल राज शर्मा ने इसे मॉडल बनाने की पहल की है। लाइब्रेरी में तैनात कनिष्ठ सहायक सुधीर चंद्र वर्मा बताते है कि रोजाना आने वाले पाठकों के लिए लॉकर की सुविधा है। 
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पूर्व एडीएम प्रकाश श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला
इस पुस्तकालय में 1980 से सदस्य पूर्व एडीएम प्रकाश श्रीवास्तव बताते हैं कि पिछले 42 साल से नियमित आ रहा हूं, जीवन में पुस्तकों से बेहतर कोई दोस्त नहीं। पुस्तक हमारे लिए बेहतर मार्गदर्शक है। बगैर पुस्तक के हम किसी ज्ञान तक नहीं पहुंच सकते। नौकरी के दौरान या अन्य जगहों पर स्थानांतरण के बाद भी जब मौका मिलता यहां आकर किताबें पढ़ने के साथ अब तक तीन किताबें लिख चुका हूं।
 
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