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बांद्रा में भीड़ जुटाने का आरोपी विनय दुबे बनारस में जमानत जब्त कराकर मुंबई की सियासत में हो गया था सक्रिय

Fri, 17 Apr 2020 12:34 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 17 Apr 2020 12:34 AM IST
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Vinay Dubey, accused of mobilizing Bandra, had become active in the politics of Mumbai by forfeiting his bail in Benares.
बांद्रा के पास जुटी बीड़ और विनय दुबे (डिजाइन फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।

मुंबई के बांद्रा में लॉक डाउन के बावजूद भीड़ जुटाने का मुख्य आरोपी विनय कुमार दूबे बनारस की सियासत में भी भाग्य आजमा चुका है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में शहर उत्तरी सीट से वह एनसीपी का प्रत्याशी बना था। मगर, इस चुनाव में जमानत जब्त कराकर वह मुंबई लौट गया था और मुंबई की सियासत में ही सक्रिय हो गया था।



बताया जाता है कि बनारस की राजनीति के जरिए मुंबई में बसे उत्तर भारतीयों के बीच पैठ बनाने के लिए वह चुनाव मैदान में उतरा था। बुरी तरह पराजित होने के बाद भी बनारस से चुनाव लड़ने की कहानी के जरिए मुंबई में धाक जमा ली थी। यही कारण है कि लोक सभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में मैदान में उतर गया था।
 

Vinay Dubey, accused of mobilizing Bandra, had become active in the politics of Mumbai by forfeiting his bail in Benares.
बांद्रा स्टेशन पर इकट्ठा हुए प्रवासी मजदूर - फोटो : amar ujala

मुंबई में रहने वाला औराई के हरिनारायणपुर निवासी विनय कुमार दूबे वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में अचानक शहर उत्तरी से पर्चा भर दिया था। एनसीपी का जनाधार बनारस में बेहद कम होने के कारण वह बहुत सुर्खियों में नहीं रहा था और चुनाव में उसे महज 574 मतों से संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में रविन्द्र जायसवाल के साथ मैदान में था और उसकी उम्र 27 साल थी। रविंद्र जायसवाल 47746 मत पाकर विजयी हुए थे।

बनारस में जमानत जब्त होने के बाद वह सीध मुंबई लौट गया और पूर्वांचल के बड़े केंद्र बनारस में विधानसभा प्रत्याशी को उसने मुंबई में अपना राजनीतिक हथियार बनाया। जमानत जब्त होने के बाद भी उत्तर भारतीय समाज के नेता में रुप में उभरने के बाद वह बनारस में बहुत सक्रिय नहीं हुआ।

Vinay Dubey, accused of mobilizing Bandra, had become active in the politics of Mumbai by forfeiting his bail in Benares.
ब्रांदा स्टेशन पर इकट्ठा हुए प्रवासी मजदूर - फोटो : Amar Ujala

वरिष्ठ भाजपा नेता और क्षेत्रीय मंत्री अशोक तिवारी बताते हैं कि बनारस न केवल पूर्वांचल बल्कि उत्तर भारत का बड़ा केंद्र शुरू से रहा है। 2012 के चुनाव में शहर उत्तरी से 28 प्रत्याशी मैदान में थे और भाजपा प्रत्याशी रविंद्र जायसवाल को विजय मिली थी।

बसपा के सुजीत मौर्या दूसरे, सपा के अब्दुल शमद तीसरे और कांग्रेस के रबैया कलाम चौथे नंबर पर थे। इसके अलावा बाकी सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। ऐसे में विनय कुमार दूबे अपनी पहचान भी नहीं बना पाया था।

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Vinay Dubey, accused of mobilizing Bandra, had become active in the politics of Mumbai by forfeiting his bail in Benares.
बांद्रा स्टेशन पर इकट्ठा हुए प्रवासी मजदूर - फोटो : Amar Ujala

इंटर पास विनय के पास महज दो लाख की संपत्ति

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में एनसीपी प्रत्याशी विनय कुमार दूबे ने चुनाव आयोग में शपथ पत्र दिया था, उसमें उसने खुद को इंटर पास बताया था। मुंबई बोर्ड से 2003 में इंटर पास विनय के पास महज दो लाख 16 हजार रुपये की संपत्ति थी। इसमें भी एक लाख 16 हजार रुपये इसके पास और एक लाख रुपये पत्नी के पास था। 
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