फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

शहादत दिवसः परमवीर चक्र विजेता की गाथा सुनाते भावुक हो जाती हैं उनकी पत्नी, आप भी पढ़ें

Mon, 10 Sep 2018 04:30 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,गाजीपुर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,गाजीपुर Updated Mon, 10 Sep 2018 04:30 PM IST
विज्ञापन
Veer abdul hamid wife get emotional when she tell story
varanasi - फोटो : amar ujala
देश पर जान न्यौछावर करने वाले वीर सपूतों का जब भी नाम लिया जाता है, तो गाजीपुर के मरणोपरांत परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद का नाम बरबस ही होठों पर चला आता है। वर्ष 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध में उन्होंने दुश्मनों का खूब लोहा लिया था। इसके बाद 1965 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग में अमरीका निर्मित अजेय पांच पैंटन टैंक को हथगोले से उड़ाने में शहीद होने वाले वीर अब्दुल हमीद की वीर गाथा उनकी विधवा रसूलन बीबी सुनाते सुनाते भावुक हो जाती हैं। आज पूरा देश इस वीर सपूत का 53वां शहादत दिवस मना रहा है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
Veer abdul hamid wife get emotional when she tell story
varanasi - फोटो : amar ujala

परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी ने दिल्ली में थल सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत के आवास पर उनसे मिल कर शहादत दिवस पर आने का निमंत्रण पत्र भेंट किया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री को भी न्योता दिया गया था। बीते वर्ष थल सेना प्रमुख गाजीपुर पहुंचे थे लेकिन इस बार वो नहीं आ पाए।  वीर अब्दुल हमीद के गांव धामुपुर में उनकी माटी को नमन करने देश की विभिन्न हस्तियां पहुंची है।



 
Veer abdul hamid wife get emotional when she tell story
varanasi - फोटो : amar ujala
वीर अब्दुल हमीद के गांव वालों के मुताबिक, वीर हमीद बचपन और किशोरावस्था में आम और बेर के फलों को पत्थर के एक वार में ही मारकर गिरा दिया करते थे। बकौल रसूलन बीबी सेना में भर्ती के बाद पहला युद्ध उन्होंने चीन से लड़ा और जंगल में भटक कर कई दिनों तक भूखे रहकर किसी तरह घर आए थे, जहां पत्ता तक खाना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 1965 में पाकिस्तान युद्ध से पहले 10 दिन के लिए छुट्टी पर आए थे।



 
विज्ञापन
विज्ञापन
Veer abdul hamid wife get emotional when she tell story
varanasi - फोटो : amar ujala
रेडियो से सूचना मिली तो हड़बड़ी में जंग के मैदान में जाने को बेताब हो गए। घर वाले मना करते रह गए। जाते वक्त कई अपशगुन हुए, उनकी बेडिंग खुल गई, साइकिल पंक्चर हो गई लेकिन भोर में वह निकल ही गए। जिस जांबाजी से उन्होंने लड़ाई लड़ी वह सबको पता है। गांव वालों का कहना है कि ढेला मारने में निशानची परमवीर चक्र विजेता का वह हुनर हथगोले से पैंटन टैंक तोड़ने के काम आया। शहीद होने तक पाकिस्तानी पैंटन टैंक तोड़ने वाले शहीद को मरणोपरांत देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र उनकी बेवा रसूलन बीबी को पूरे सम्मान के साथ दिया गया।
विज्ञापन
Veer abdul hamid wife get emotional when she tell story
varanasi - फोटो : amar ujala
बता दें कि गाजीपुर जिले के  धामूपुर गांव में परमवीर चक्र विजेता हवलदार अब्दुल हमीद का जन्म एक गरीब परिवार उस्मान खां दर्जी के घर एक जुलाई 1933 को हुआ था। अब्दुल हमीद को बचपन से ही सेना में भर्ती होने का शौक था। गरीबी के कारण उन्होंने अपने पिता के काम में भी हाथ बंटाना शुरू कर दिया और दर्जी का काम भी सीख लिए। उन्हें खेल-कूद का भी शौक था। अब्दुल हमीद 22 दिसंबर 1954 को बनारस जाकर फौज में भर्ती हो गए। 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed