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परिवार आत्महत्या केस: पापा नींद की गोली देकर गला दबा देना, सुसाइडट नोट से चौंकाने वाला खुलासा
Sat, 15 Feb 2020 10:31 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 15 Feb 2020 10:31 AM IST
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family suicide case
- फोटो : अमर उजाला
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सुसाइड नोट के अनुसार, पति और पत्नी ने जब जान देने की बात आपस में तय कर ली तो उन्होंने बच्चों से भी इस संबंध में बात की। हर्ष स्नातक की पढ़ाई कर रहा था और हिमांशी इंटरमीडिएट का प्राइवेट फार्म भरी थी। दोनों बच्चों ने चेतन से कहा था कि हमें नींद की गोली देकर पापा गला दबा देना। बच्चों ने जैसा कहा वैसा ही उनके साथ चेतन ने किया।
फाइल फोटो
- फोटो : Family suicide in varanasi wife wrote suicide note
सुसाइड नोट के अनुसार, रात दो बजे दोनों बच्चों को नींद की गोली देकर चेतन ने पत्नी की मौजूदगी में उनका गला दबाया। उधर, चेतन का हाथ पीछे की ओर ढीलेढाले टेप से बंधा था। पुलिस के अनुसार, चेतन ने ऐसा इसलिए किया था ताकि फंदे पर लटकने के बाद विचार बदले तो वह खुद को बचाने का प्रयास न कर सके। चेतन की पत्नी के दोनों हाथ में भी टेप लगा हुआ था और वह भी ढीलाढाला सा था।
मौके पर जमा भीड़
- फोटो : अमर उजाला
महीने में 18 हजार रुपये थी चेतन की आय
सुसाइड नोट के अनुसार, जालीदार काले पंखे असेंबल करने का आर्डर मिलता था और काम होता था तो चेतन को प्रतिमाह पांच हजार रुपये मिलते थे। इसके अलावा बुलानाला में उसकी दुकान है, जिसका किराया प्रति माह 26 हजार रुपये आता है। इसमें से 13 हजार रवींद्र और 13 हजार चेतन लेता था। मोहल्ले के लोगों ने कहा कि ऐसा भी नहीं था कि परिवार गंभीर आर्थिक तंगी का शिकार था। अपना मकान है और 13 हजार रुपये महीने में मिलना तय ही था। इतने में आसानी से परिवार का पालन पोषण संभव था।
सुसाइड नोट के अनुसार, जालीदार काले पंखे असेंबल करने का आर्डर मिलता था और काम होता था तो चेतन को प्रतिमाह पांच हजार रुपये मिलते थे। इसके अलावा बुलानाला में उसकी दुकान है, जिसका किराया प्रति माह 26 हजार रुपये आता है। इसमें से 13 हजार रवींद्र और 13 हजार चेतन लेता था। मोहल्ले के लोगों ने कहा कि ऐसा भी नहीं था कि परिवार गंभीर आर्थिक तंगी का शिकार था। अपना मकान है और 13 हजार रुपये महीने में मिलना तय ही था। इतने में आसानी से परिवार का पालन पोषण संभव था।
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Family Suicide case
- फोटो : अमर उजाला
फोन न उठने के कारण पुलिस को आधा घंटा लगा घर खोजने में
चेतन ने 4:35 बजे सौ नंबर पर कॉल कर कहा कि दोनों बच्चे खत्म हो गए हैं और अब मैं जान देने जा रहा हूं। इस सूचना पर पीआरवी और सिटी कंट्रोल रूम के पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। जिस मोबाइल नंबर से फोन आया था, उसकी जीपीएस लोकेशन की मदद से पुलिस पहुंची और कॉल करने लगी तो रिसीव ही नहीं हो पा रहा था। ट्रू कॉलर से नंबर चेक किया गया तो उस पर हिमांशी लिख कर आया।
चेतन ने 4:35 बजे सौ नंबर पर कॉल कर कहा कि दोनों बच्चे खत्म हो गए हैं और अब मैं जान देने जा रहा हूं। इस सूचना पर पीआरवी और सिटी कंट्रोल रूम के पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। जिस मोबाइल नंबर से फोन आया था, उसकी जीपीएस लोकेशन की मदद से पुलिस पहुंची और कॉल करने लगी तो रिसीव ही नहीं हो पा रहा था। ट्रू कॉलर से नंबर चेक किया गया तो उस पर हिमांशी लिख कर आया।
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चेतन और उसका परिवार (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
भोर में मोहल्ले के लोगों से हिमांशी के बारे में पुलिस पूछी तो कोई बता नहीं सका। पुलिसकर्मियों ने नंबर को मोबाइल में सेव कर व्हाट्सएप पर उसे चेक किया तो रवींद्र नाथ की फोटो आई। पुलिस कर्मियों ने रवींद्र नाथ की फोटो दिखाकर उनके बारे में पूछना शुरू किया तो मोहल्ले का एक युवक सोनू ने उनके घर तक पहुंचाया।