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Gyanvapi Masjid Case: चारों तरफ से बंद है एक तहखाना, अंदर छिपे हैं राज, टीम के सदस्य ने किया बड़ा दावा
Tue, 17 May 2022 09:58 AM IST
शाहरुख खान
घनश्याम मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी
घनश्याम मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 17 May 2022 09:58 AM IST
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Varanasi Gyanvapi Masjid Case
- फोटो : अमर उजाला
कमीशन की कार्रवाई पूरी होने के साथ ही वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर के अंदर के राज भी बाहर भी आने लगे हैं। कमीशन की कार्रवाई में शामिल एक सदस्य का दावा है कि तहखाने से जुड़ा एक हिस्सा ऐसा है, जो चारों तरफ से दीवारों से बंद है। इसके अंदर कई राज कैद होने की संभावना जताई जा रही है। सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने तहखाने का ताला खोलकर या तोड़कर कमीशन की कार्रवाई का आदेश दिया था। इसमें तहखानों के तीन कमरों में दो के ताले खोले गए और एक का ताला तोड़ा गया। जबकि एक कमरे में ताला नहीं था, मगर इसके पास ही एक हिस्सा ऐसा भी है जिसके चारों तरफ दीवार चुनवाई गई है। कमीशन की कार्रवाई के दौरान इस हिस्से की फोटो व वीडियोग्राफी नहीं हुई है। कारण, कमीशन की कार्रवाई में किसी तरह के निर्माण में छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता है।
Gyanvapi Masjid Case
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे में कमीशन की कार्रवाई से जुड़े सदस्यों का मानना है कि इस बंद हिस्से में कई राज हो सकते हैं। इसके अंदर मलबा और धार्मिक स्थल से जुड़े अन्य साक्ष्य बंद किए गए हैं। हालांकि इस हिस्से की जांच के लिए भी वादी पक्ष की ओर से मांग की जा सकती है।
ज्ञानवापी मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
26 साल पहले भी कमीशन की कार्रवाई में सामने आया था सच
आपको बता दें कि ज्ञानवापी परिसर में 26 साल पहले हुई कमीशन की कार्रवाई में हिंदू मंदिरों के भग्नावशेष मिलने का सच सामने आया था। सिविल जज की अदालत में दर्ज एंसिएंट आइडल स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर व अन्य के वाद में भी न्यायालय ने विशेष अधिवक्ता आयुक्त के तौर पर राजेश्वर प्रसाद सिंह को नियुक्त किया था।
आपको बता दें कि ज्ञानवापी परिसर में 26 साल पहले हुई कमीशन की कार्रवाई में हिंदू मंदिरों के भग्नावशेष मिलने का सच सामने आया था। सिविल जज की अदालत में दर्ज एंसिएंट आइडल स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर व अन्य के वाद में भी न्यायालय ने विशेष अधिवक्ता आयुक्त के तौर पर राजेश्वर प्रसाद सिंह को नियुक्त किया था।
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Gyanvapi Masjid Case
- फोटो : अमर उजाला
न्यायालय में पेश उनकी रिपोर्ट में साफ तौर पर मस्जिद परिसर में प्राचीन मंदिर के भग्नावशेष मिलने का दाव किया गया था। इसके साथ ही परिसर के पूरब तट पर हनुमान प्रतिमा, गंगा व गंगेश्वर मंदिर की भी पुष्टि की गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2019 में न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को रडार तकनीक से सर्वे का आदेश दिया था। हालांकि इस मामले में उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है।
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Gyanvapi Masjid Case
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, अदालत में दर्ज एंशिएंट आइडल स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर व अन्य के वाद में 27 जुलाई 1996 को न्यायालय ने कमीशन की कार्रवाई का आदेश जारी करते हुए राजेश्वर प्रसाद सिंह को विशेष अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त किया था। इसमें कमीशन की ओर से दर्ज रिपोर्ट में साफ किया गया था कि विवादित स्थल के चारों तरफ प्राचीन काल की निर्मित पुस्ती को दिखाया गया, जो प्राचीन मंदिर का अवशेष देखने से प्रतीत हो रहा है।