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12वीं बरसी पर बनारस ने कुछ इस तरह याद किया अपने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 22 Aug 2018 10:22 AM IST
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bismillah khan
- फोटो : अमर उजाला
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कुछ लोग दुनिया में ऐसे होते हैं जो जीते-जी तो लोगों के लिए आदर्श होते ही हैं, मरने के बाद भी लोगों के लिए मिसाल बन जाते हैं, इन्हीं महान लोगों में नाम शामिल हैं भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां। मरहूम उस्ताद बिस्मिल्ला खां की 12वीं बरसी मंगलवार को वाराणसी के फातमान स्थित उनके मकबरे पर अकीदत के साथ मनाई गई। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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शहनाई के शहंशाह उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के घरवालों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पहुंचे उनके चाहने वालों ने उन्हें शिद्दत से याद किया। उनकी कब्र को इस कदर सजाया गया कि गुलाबों की पंखुडि़यों, इत्र और अगरबत्ती की खुशबू से पूरा फातमान गमक उठा।
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उस्ताद बिस्मिल्ला खां की पुण्यतिथि पर उनके मकबरे पर सुबह ही लोग पहुंच गए थे। उनकी कब्र पर फूल माला चढ़ाकर उनके चाहने वालों ने फातिहा पढ़ी। इससे पहले कुरानख्वानी भी हुई। इसके बाद लोगों ने उस्ताद को खिराजे अकीदत पेश की। पूर्व विधायक अजय राय भी फातमान पहुंचे थे। इसके बाद एडीएम सिटी वीरेंद्र सिंह और एसपी सिटी दिनेश सिंह ने भी उस्ताद की कब्र पर फूल चढ़ाए।
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एसपी सिटी ने कहा कि उस्ताद बिस्मिल्ला खां ने काशी को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया है। चंद्रशेखर फाउंडेशन के अध्यक्ष हिमांशु सिंह समेत कई सदस्यों ने उस्ताद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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उस्ताद की बरसी पर एक बार फिर से उस्ताद के नाम पर एकेडमी और म्यूजियम न बनाए जाने की टीस उठी। उस्ताद के परपौत्र आफाक हैदर ने कहा कि दादा के इंतकाल के वक्त सरकार ने कई वादे किए थे। उनकी याद में शहनाई एकेडमी, म्यूजियम और कैंट स्टेशन पर उनकी प्रतिमा लगाए जाने की बात हुई थी लेकिन 12 साल गुजर गए, हुआ कुछ नहीं। दादा हुजूर का एक मकबरा ही बन पाया है, उसके लिए भी कितनी जद्दोजहद करनी पड़ी।