आतंकवाद के शिकार हुए कश्मीरी पंडितों के आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना को लेकर बुधवार को त्रिपिंडी श्राद्ध हुआ। काशी के पिशाचमोचन तीर्थ पर आयोजित त्रिपिंडी श्राद्ध कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने कश्मीरी ब्राह्मणों का प्रतिनिधित्व किया। इस अनुष्ठान में उन कश्मीरी पंडितों के परिजन भी शामिल हुए जिन्होंने अपनों की जान नरसंहार के दौरान में गंवाई थी।
अनुष्ठान के बाद अनुपम खेर ने कहा कि आज का दिन उन कश्मीरी हिंदुओं के लिए जिन्होंने नरसंहार में अपनी जान गंवाई। पूरे 32 साल बाद उन अतृप्त आत्माओं के मोक्ष की कामना से ये अनुष्ठान हुआ है। 32 वर्षों तक किसी ने सुध नहीं ली। इस मौके पर उन्होंने खुलकर कहा कि 32 वर्षों तक किसी ने कश्मीरी पंडितों के बारे में कोई बात नहीं की। अब वक्त आ गया है। सभी अपना फर्ज निभाएं और उनकी वापसी कराएं। उन्होंने कश्मीर में बदले हालातों पर भी अपने विचार व्यक्त किए तो दूसरी ओर उन्होंने देश में हालातों पर भी मंथन किया।
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कश्मीरी पंडितों के मोक्ष की कामना से काशी में हुआ त्रिपिंडी श्राद्ध
- फोटो : अमर उजाला
काशी के पिचाशमोचन तीर्थ पर बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कश्मीर में मारे गए हिंदुओं की आत्मा के शांति की लिए त्रिपिंडी श्राद्ध कर्म का आयोजन हुआ। फिल्म अभिनेता अनुपम खेर सहित देश के अलग-अलग राज्यों से आए विद्वान और संत इस विशेष अनुष्ठान के साक्षी बने। सामाजिक संस्था आगमन और ब्रह्म सेना के संयुक्त तत्वावधान में विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ।
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कश्मीरी पंडितों के मोक्ष की कामना से काशी में हुआ त्रिपिंडी श्राद्ध
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संस्था के संस्थापक डॉ. संतोष ओझा मुख्य यजमान रहे। आचार्यत्व पंडित श्रीनाथ पाठक उर्फ रानी गुरु ने किया। श्राद्धकर्ता डॉ. ओझा ने बताया कि कश्मीर नरसंहार में न जाने कितने ऐसे लोग थे जिनका श्राद्ध तक नहीं हुआ। सनातन धर्म के मान्यताओं के मुताबिक ऐसी अकाल मृत्यु के बाद मृतक की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए विशेष श्राद्ध अनिवार्य होता है।
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कश्मीरी पंडितों के मोक्ष की कामना से काशी में हुआ त्रिपिंडी श्राद्ध
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अनुमप खेर ने कहा कि जब मैं कश्मीर फाइल्स की शूटिंग कर रहा था, उसी दौरान मेरे मन में यह विचार आया था। बताया कि यह मेरे निजी जीवन से जुड़ी कहानी है। 32 साल बाद कश्मीर फाइल्स बन रही थी और ऐसी बहुत सारी कहानियां सामने आईं, जिसमें आतंकवाद का शिकार हुए कश्मीरी हिंदुओं को मारा गया था। महिलाओं के साथ गलत हुआ था। तभी मैंने सोचा था कि मैं ऐसी पूजा करवाऊंगा।
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कश्मीरी पंडितों के मोक्ष की कामना से काशी में हुआ त्रिपिंडी श्राद्ध
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काशी के ब्राह्मणों ने बताया था कि त्रिपिंडी श्राद्ध उनके मोक्ष के लिए की जाती है, जिनकी मौत की वजह या उनका नाम पता नहीं होता है। इस वजह से मैं यह पूजा करवाने आया हूं। सिर्फ कश्मीरी पंडितों को हो नहीं बल्कि जो भी आतंकवाद के शिकार हुए हैं, उन सभी की आत्मा की शांति के लिए यहां पूजा करवाने आया हूं।