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काशी के इस कुंड पर किन्नरों ने किया पिंडदान, बताई अपनी दुखभरी कहानी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 03 Oct 2018 10:18 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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वाराणसी में आत्मा की शांति के लिए किन्नरों ने पिंडदान किया। किन्नर अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि किन्नरों की कहानी दुखभरी होती है इसलिये हर साल किन्नरों के आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें....
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पिशाचमोचन कुंड पर मंगलवार को पिंडदान के दौरान उन्होंने बताया कि किन्नरों की जिंदगी बहुत दुखभरी होती है। जब परिवार के लोगों को पता चलता है कि ये किन्नर है तो उसे घर से निकाल दिया जाता है। इसके बाद इतनी परेशानी झेलनी पड़ती है कि घर का भी त्याग करना पड़ता है।
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समाज ने हम लोगों को ऐसा कर दिया है कि हम लोगों को अंतिम संस्कार तक करने में परेशानी आती है। निधन के बाद अगर किसी की अस्थि लेकर उसके घर जाते हैं तो परिजन अस्थि लेने से भी इंकार कर देते हैं। इसलिए किन्नरों के भटकती आत्माओं को मोक्ष देने के लिए यह आयोजन करते हैं।
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यह आयोजन पिछले तीन साल से लगातार करते चले आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह परंपरा कोई नई नहीं है। महाभारत काल में भी शिखंडी ने किन्नरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया था, तब से यह परंपरा चली आ रही है।
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लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि इलाहाबाद में लगने वाले कुंभ में किन्नर समाज के लोग शाही स्नान करेंगे। इस दौरान अन्य अखाड़ों की तरह पेशवाई भी धूमधाम से निकाली जाएगी। इसके लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। उन्होंने प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड बनाने की मांग की है।