उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद भाजपा के विधायक 19 मार्च को अपने नेता का चुनाव करेंगे। सूबे के मुखिया की रेस में रेल राज्य मंत्री और गाजीपुर से भाजपा सांसद मनोज सिन्हा सबसे आगे बताए जा रहे हैं। आगे की स्लाइड में जानें पांच फैक्टर जिनकी वजह से देश के सबसे बड़े राज्य की कुर्सी मनोज सिन्हा को मिल सकती है-
इन पांच कारणों से यूपी सीएम की रेस में मनोज सिन्हा सबसे आगे
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रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के विश्वासप्राप्त माने जाते हैं। पीएम मोदी और मनोज सिन्हा के बीच संबंध आरएसएस के दिनों से है। जब मोदी प्रचारक थे तब मनोज सिन्हा के गांव गाजीपुर आते थे। पीएम मोदी जब गुजरात के सीएम थे तब वह मनोज सिन्हा का प्रचार करने गाजीपुर आए थे।
आईआईटी बीएचयू से पढ़े मनोज सिन्हा की छवि काफी साफ सुथरी है। पेशे से सिविल इंजीनियर मनोज सिंहा छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और बीएचयू छात्र संघ के नेता रहे। वर्ष 1996 में वह पहली बार सांसद बने थे। उनकी साफ सुथरी छवि और रेल मंत्रालय में बढ़िया काम की वजह से प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई 2016 में कैबिनेट में बदलाव के दौरान दूरसंचार मंत्रालय की भी जिम्मेदारी उन्हें दी। मनोज सिन्हा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश विशेषकर वाराणसी के विकास के लिए काफी काम किया है।
विधानसभा चुनाव में जोरदार जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी का अब अगला लक्ष्य मिशन 2019 है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव को जीतने के लिए भाजपा को अगले दो सालों में उत्तर प्रदेश में तेजी से विकास कार्य करने होंगे। इसके लिए मनोज सिन्हा एक बढ़िया सीएम साबित हो सकते हैं। ईमानदार छवि और काम के प्रति निष्ठा सीएम पद की रेस में सबसे आगे करती है।
तीसरी बार सांसद चुने गए मनोज सिन्हा पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में काफी प्रभाव रखने वाले भूमिहार जाति से आते हैं। भूमिहार बिरादरी के प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बिहार में करीब सात प्रतिशत जनसंख्या भूमिहार है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, मऊ, बलिया, भदोही, आजमगढ़, वाराणसी, चंदौली में भूमिहार जाति का काफी प्रभाव है। इस तरह जातिगत समीकरण से भी मनोज सिन्हा काफी आगे हैं।