फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

यहां होलिका की आग में निर्वस्त्र होकर लिट्टी सेंकने की मान्यता, खाने आते हैं कई राज्यों के लोग

Thu, 01 Mar 2018 05:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आजमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आजमगढ़ Updated Thu, 01 Mar 2018 05:27 PM IST
विज्ञापन
there is a special holika dahan at azamgarh village just for spritual
होलिका दहन - फोटो : demo pic
होलिका दहन पर देश भर में अलग-अलग रस्मों और मान्यताओं के बारे में आपने सुना होगा। आजमगढ़ के एक गांव में भी होलिका  दहन पर अनोखी मान्यता है। यहां होलिका की आग में निर्वस्त्र होकर कुछ लोग लिट्टी सेंकतें हैं। खास बात यह कि इस लिट्टी को खाने के लिए दूसरे गांव तो छोड़िए दूसरे प्रदेश से भी लोग आते हैं। आगे की  स्लाइड्स में जानिए पूरा मामला...

 
there is a special holika dahan at azamgarh village just for spritual
होलिका - फोटो : demo
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है होलिका दहन।  यह बताती है कि आपकी मजबूत इच्छाशक्ति आपको सारी बुराईयों से बचा सकती है, जैसे प्रह्लाद की थी।  इसी लिए आज भी होली के त्यौहार पर होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन पर कुछ जगहों की अपनी अपनी मान्यता भी होती है। एक ऐसी ही खास और अनोखी मान्यता आजमगढ़ के एक गांव में है। 
there is a special holika dahan at azamgarh village just for spritual
होलिका दहन - फोटो : demo
कहते हैं कि होली का सम्मत जलते ही बहुत से दुखों का अंत हो जाता है। लेकिन होली के सम्मत में बनी लिट्टी खाने से मिर्गी और फरका जैसी बिमारी ठीक होती है, ऐसा पहली बार देखने को मिला है। यहां होलिका के आग में  निर्वस्त्र होकर जौ की लिट्टी सेंकी जाती है। इस खास लिट्टी को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने के लिए कई राज्यों के लोग इस गांव में आते हैं। कहा जाता है कि यह लिट्टी खाने से मिरगी और फरका जैसे रोग का नाश होता है। यह  गांव है सगड़ी तहसील क्षेत्र का झंझवा तुरकौली  गांव। 
विज्ञापन
विज्ञापन
there is a special holika dahan at azamgarh village just for spritual
होलिका दहन - फोटो : demo
इस पर लोगों को पूरा यकीन है। यही वजह है कि होलिका दहन पर दूर-दूर के लोग आते हैं और लिट्टी का सेवन करते हैं। इस दिन पूरे गांव में मेले जैसा माहौल रहता है। लोगों का मानना है कि लिट्टी खाने से तीन से पांच साल के अंदर मिरगी और फरका रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। झंझवा निवासी  66 वर्षीय राम पलट चौहान और 63 वर्षीय पतिराम चौहान बताते हैं कि  होलिका दहन के बाद सुनसान हो जाने  पर होलिका दहन स्थल पर निर्वस्त्र होकर हम लोग जौ की लिट्टी पकाते हैं। इस दौरान यह भी ध्यान रखा जाता है कि लिट्टी पकाते समय अगल-बगल कोई न हो, और न ही कोई रोक-टोक करे।
विज्ञापन
there is a special holika dahan at azamgarh village just for spritual
होलीका दहन - फोटो : demo
लिट्टी पकाने के बाद हम लोग पूरे गांव में घूम-घूम कर दूर-दराज से आए लोगों को लिट्टी खिलाते हैं। लगातार तीन से पांच साल तक लिट्टी खाने से मिर्गी और फरका रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। यह लिट्टी खाने के लिए लोग बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश से आते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता मेडही चौहान लिट्टी बनाकर दवा के रूप में खिलाते थे। उनकी मृत्यु के बाद हम यह काम करता हूं। इस नेक काम करने से मन को बड़ी शांति मिलती है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed