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शिक्षक दिवस विशेष: नए दौर में बहुत कुछ बदला पर नहीं बदली तो गुरु-शिष्य परंपरा

Wed, 05 Sep 2018 10:11 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Wed, 05 Sep 2018 10:11 AM IST
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Teachers day special many thing schanged but not changed student relation
batuk - फोटो : amar ujala
देश-दुनिया में सर्वविद्या की राजधानी के रूप में विख्यात काशी में गुरु-शिष्य परंपरा का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। यह परंपरा आज भी उसी रूप में वेद विद्यालयों और संस्कृत महाविद्यालयों में जिंदा है। हालांकि बदलते दौर के साथ बहुत कुछ बदलता गया लेकिन गुरु-शिष्य की परंपरा आज भी उसी रूप में नजर आती है। आगे की स्लाइड्स में जानिए..
Teachers day special many thing schanged but not changed student relation
batuk - फोटो : amar ujala
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट स्थित श्री भगवान विष्णु स्वामी सतुआ बाबा संस्कृत महाविद्यालय में बटुक गुरु-शिष्य परंपरा के तहत वेद, कर्मकांड, ज्योतिष और व्याकरण का अध्ययन करते हैं। 
 
Teachers day special many thing schanged but not changed student relation
varanasi - फोटो : amar ujala
यहां व्याकरण के शिक्षक नीरज शर्मा ने बताया कि रोजाना सांध्योपासना के साथ बटुकों की जीवनचर्या आरंभ होती है और वेद अध्ययन के साथ उसका समापन होता है। काशी के लगभग सभी वेद विद्यालयों में बटुकों की यही दिनचर्या है। 
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Teachers day special many thing schanged but not changed student relation
varanasi - फोटो : amar ujala

सतुआ बाबा आश्रम के पीठाधीश्वर संतोष दास महाराज का कहना है कि जब वह 20 साल पहले इस शहर में आए थे। उनकी कोई पहचान नहीं थी। उनके पास कोई ठिकाना नहीं था। गुरु-शिष्य की परंपरा की ही देन है कि मैं आज भी संत समाज की सेवा और वैदिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार में जुटा हूं। मुझे जो मेरे गुरु ने दिया, मैं उसी को अपने शिष्यों को लौटाने का प्रयास कर रहा हूं। 
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Teachers day special many thing schanged but not changed student relation
varanasi - फोटो : amar ujala

सतुआ बाबा आश्रम के पीठाधीश्वर संतोष दास महाराज का कहना है कि जब वह 20 साल पहले इस शहर में आए थे। उनकी कोई पहचान नहीं थी। उनके पास कोई ठिकाना नहीं था। गुरु-शिष्य की परंपरा की ही देन है कि मैं आज भी संत समाज की सेवा और वैदिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार में जुटा हूं। मुझे जो मेरे गुरु ने दिया, मैं उसी को अपने शिष्यों को लौटाने का प्रयास कर रहा हूं। 
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