पद्मश्री एसपी बालासुब्रमण्यम की संकटमोचन दरबार में गाने की इच्छा अधूरी रह गई। शुक्रवार को कोरोना से उनके निधन की सूचना मिलते ही उनके प्रशंसकों और दक्षिण भारतीय समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई।
एसपी बालासुब्रमण्यम की संकटमोचन के दरबार में गाने की इच्छा रह गई अधूरी, अस्सी घाट पर सजाई थी संगीतांजलि
बटुकों संग आरती करने के बाद उन्होंने यज्ञ में भी हिस्सा लिया था। संगीत का जब मंच सजा तो उन्होंने संगीत रसिकों के अंतर्मन को तृप्त कर दिया था। राग अहिर भैरव में आदि ताल में निबद्ध शिव स्तुति का गान उनके मुख से अद्भुत था। ओम नम: शिवाय, गंगा तरंग रमणीय जटा कलापम्...के बाद जब उन्होंने विराम लिया तो पूरा मंच हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
उन्होंने आयोजकों से दोबारा इस मंच पर प्रस्तुति देने का वायदा किया था। चिंतामणि गणेश मंदिर के महंत चल्ला सुब्बा राव शास्त्री ने बताया कि एसपी बालसुब्रमण्यम संकटमोचन के दरबार में भी संगीतांजलि देना चाहते थे लेकिन उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई।
चिंतामणि गणेश मंदिर में स्थापित किया था शिवलिंग
चिंतामणि गणेश मंदिर से एसपी बालसुब्रमण्यम का पुराना नाता था। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान ही शिवलिंग की स्थापना की थी। आयोजन के दौरान मंदिर में ही दक्षिण भारतीय समुदाय के लोगों के साथ उन्होंने काफी तस्वीरें खिंचवाई थीं। उनके द्वारा स्थापित शिवलिंग की पूजा आज भी होती है।
अगस्त 2017 में काशी प्रवास के दौरान एसपी बालासुब्रमण्यम ने सपरिवार श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन किए। इसके उपरांत उन्होंने शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर के महंत चल्ला सुब्बाराव ने बताया कि काशी में शिवलिंग की स्थापना करना उनकी पुरानी इच्छा थी। काशी प्रवास के दौरान उन्होंने अपनी इच्छा भी पूरी की और इस दौरान मंदिर में सपत्नीक तीन दिनों तक रहे और मंदिर में शिवलिंग की जो स्थापना की उसकी पूजा आज भी की जाती है।