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सोनभद्र के डीएम का बच्चा जाता है आंगनबाड़ी केंद्र, तस्वीरों में देखें कैसे कर रहा पढ़ाई

Thu, 09 May 2019 10:42 AM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,सोनभद्र
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,सोनभद्र Published by: Sayali Maurya Updated Thu, 09 May 2019 10:42 AM IST
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Sonbhadra DM 3 year old son study in aanganbadi center
डीएम का बेटा अनय - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश में सोनभद्र के जिलाधिकारी ने एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। जहां आज सरकारी अफसर अपने बच्चों को प्ले वे स्कूल से लेकर कांवेंट स्कूल में पढ़ा रहे हैं, वहीं, सोनभद्र के डीएम अपने बेटे को आगनबाड़ी केंद्र में पढ़ा रहे हैं। तस्वीरें देखें आगे की स्लाइड्स में...

Sonbhadra DM 3 year old son study in aanganbadi center

सोनभद्र के जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने सदर ब्लॉक के उरमौरा ग्राम पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र में अपने तीन वर्षीय पुत्र अनय का नाम दर्ज कराया है। बदलते परिवेश में जब लोग आधुनिक शिक्षा के पीछे भाग रहे हैं। ऐसे में डीएम के इस कदम की चर्चा के साथ सराहना भी हो रही है।

Sonbhadra DM 3 year old son study in aanganbadi center

लोगों में चर्चा है कि वर्तमान में मध्यम वर्गीय परिवार के लोग अपने बच्चों का नामांकन प्राइवेट विद्यालयों में करा रहे हैं। ताकि उन्हें आधुनिक और बेहतर शिक्षा दें सकें। परिषदीय विद्यालयों या फिर आंगनबाड़ी केंद्रों में आम तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के बच्चे ही नामांकित होते हैं। लेकिन डीएम अंकित कुमार अग्रवाल ने लोगों की इस धारणा के विपरीत अपने तीन वर्षीय पुत्र अनय का नामांकन आंगनबाड़ी केंद्र उरमौरा में कराया है।

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Sonbhadra DM 3 year old son study in aanganbadi center

आंगनबाड़ी केंद्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका अनय को भी और बच्चों की तरह ही वर्णमाला पढ़ाती हैं। साथ ही उसके साथ खेलती भी हैं। अनय भी दूसरे बच्चों की तरह केंद्र में बंटने वाले पोषाहार को काफी चाव से खाता है। 

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Sonbhadra DM 3 year old son study in aanganbadi center

डीएम का कहना है कि उनका बेटा अभी इतना बड़ा नहीं है कि वह शिक्षा ग्रहण करें, लेकिन वहां को आंगनबाड़ी केंद्र काफी अच्छा है। बेटा वहां खेलेगा और इससे साइकोलाजिकल रूप से वह शिक्षा के प्रति तैयार होगा। इससे लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी। जिलाधिकारी ने कहा कि जब सरकारी अधिकारी, कर्मचारी अपने बच्चों का प्रवेश सरकारी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में कराएंगे तो दूसरों को भी इससे प्रेरणा मिलेगी और वे भी अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय में पढ़वाएंगे। उनका भी हौसला बुलंद होगा।

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