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#MeToo कैंपेन पर शबाना आजमी ने तोड़ी चुप्पी, बनारस में दिया बड़ा बयान, जानिए क्या कहा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sat, 03 Nov 2018 08:29 AM IST
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मशहूर फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी का कहना है कि औरतों के लिए बहुत जरूरी है कि जहां वे काम करती हैं, वह जगह सुरक्षित हो। महिलाएं अपना काम बगैर किसी डर के करें। एक कार्यक्रम के सिलसिले से बनारस आईं शबाना आजमी ने बॉलीवुड में ‘मीटू’ कैंपेन के सवाल पर ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि वर्क प्लेस पर महिलाओं का उत्पीड़न होता है और बॉलीवुड इससे कहीं भी अछूता नहीं है।
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शबाना आजमी ने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री एकजुट हुई और इस सिलसिले में सख्त कदम उठाए हैं। पीडि़तों के पक्ष में लोग खड़े हुए। कई निर्देशकों को इस वजह से फिल्में छोड़नी पड़ीं। एक तरह से देश के सामने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने एक मिसाल कायम की है। महिलाओं के रोजगार और उनकी शिक्षा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज जरूरी है कि गांव की महिलाएं सशक्त हों। उनके पास रोजगार होगा तो उनकी जिंदगी में तब्दीली आएगी। रोजगार के साथ आत्मसम्मन भी जागता है। वो अपनी अहमियत समझेंगी।
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राम मंदिर के मुद्दे पर शबाना आजमी ने कहा कि मुझे मंदिर मस्जिद की बात पर कोई हैरानी नहीं होती। आज का राजनीतिक माहौल ही ऐसा है कि सांप्रदायिक मुद्दों को आगे लाया जाता है। ये देश के लिए नुकसानदेय है। आज की लड़ाई हिंदु मुस्लिम के बीच नहीं विचारधारा की है। एक लड़ाई लिबरल और प्रोग्रेसिव बनाती है, दूसरी कट्टरपंथ की तरफ लेकर जाती है। इससे हमें निकलना चाहिए।
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एक हिंदू को ये फैसला करना है कि वो विवेकानंद के हिंदुत्व को मानते हैं या फिर उनकी जो धर्म के नाम लोगों को बांटते हैं। इसी तरह मुसलमानों को तय करना होगा कि वो मौलाना आजाद की बात सुनना पसंद करते हैं या किसी कट्टरपंथी की।