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सावन विशेषः महाहर धाम में पूरी होती है हर कामना, राजा दशरथ ने कराया था निर्माण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Mon, 20 Aug 2018 04:57 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का मरदह क्षेत्र खुद में पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहर समेटे है। गाजीपुर के मरदह स्थित महाहर धाम में प्राचीन तेरह मुखी शिवलिंग स्थापित है। जहां महाशिवरात्रि पर भक्तों का रेला उमड़ता है तो वहीं पूरे सावन माह मंदिर परिसर घंटों की आवाज से गुंजायमान रहता है। आगे की स्लाइड्स में जानें इस धाम के रोचक तथ्य...
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गाजीपुर जिला मुख्यालय से एनएच-29 जो गोरखपुर होते हुए नेपाल को जाता है। इसी सड़क पर पूर्व दिशा में तकरीबन 35 किलोमीटर दूर यही वो स्थान है जो मरदह के नाम से जाना जाता है। यहां सावन में बाबा भक्तों का रेला उमड़ता है।
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ऐसी मान्यता है कि इस धाम का निर्माण राजा दशरथ ने कराया था। ऐसा माना जाता है कि महाहर धाम में राजा दशरथ का शब्दभेदी बाण गलती से श्रवण कुमार को जा लगा, जिससे उसकी वहीं मौत हो गई थी। यही वो स्थान है जहां श्रवण कुमार के अंधे और बूढ़े मां -बाप ने राजा दशरथ को श्राप दिया था और उन्होंने भी यहीं प्राण त्यागे थे।
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बाद में ब्रह्म हत्या से बचने के लिए राजा दशरथ ने इस स्थान पर शिव परिवार व भगवान ब्रह्मा की स्थापना की। लोगों की मानें तो राजा दशरथ यहां महल बनाकर अयोध्या से आते-जाते रहते थे।
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लोगों का मानना है कि राजा दशरथ की गढ़ी जो जमीन के नीचे दबी पड़ी है उसमें खजाना दबा हुआ है। जिसे कई बार निकालने की कोशिश हुई लेकिन कोई कामयाब नहीं हुआ और आज भी वह रहस्य का विषय बना हुआ है। यह महल दशरथ के गढ़ी के नाम से विख्यात है।