काशी पुराधिपति शिव की नगरी काशी सावन में शिवभक्तों से बम-बम रहेगी। सावन में जहां एक तरफ शिवभक्तों का महाकुंभ काशी विश्वनाथ धाम में लगेगा, वहीं शहर के शिवमंदिरों में भी भक्तों की अनवरत कतार रहेगी। कोरोना संक्रमण के दो साल बाद सावन के महीने में शिवनगरी में सावन का उल्लास घाट से लेकर गलियों तक नजर आएगा। मंदिर प्रशासन ने शिवभक्तों की सुरक्षा और दर्शन पूजन का खाका तैयार कर लिया है। श्री काशी विश्वनाथ धाम में सावन के महीने में 60 लाख से अधिक शिवभक्तों के आने की उम्मीद है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार सावन के हर सोमवार को छह लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया गया है। मंदिर प्रशासन सावन में भक्तों की भीड़ को देखते हुए ही तैयारियों को अंजाम दे रहा है। सावन में पहला मौका होगा जब शिवभक्त गंगधार से गंगाधार की राह को बोल-बम के जयकारों से जागृत करेंगे। श्रद्धालु जिस रास्ते से मंदिर में प्रवेश करेंगे उसी रास्ते से वह बाहर भी निकलेंगे।
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बाबा दरबार
- फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालु ललिता घाट से गंगाजल लेकर मंदिर चौक के प्रवेश द्वार से मंदिर परिसर के पूर्वी गेट से प्रवेश करेंगे। बाबा का दर्शन पूजन करने के बाद पूर्वी गेट से ही मंदिर चौक होते हुए गंगा द्वार से बाहर निकल जाएंगे। गेट नंबर चार से वीआईपी और टिकटधारी श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाएगा। यहां से श्रद्धालु कतारबद्ध होकर मंदिर चौक में पूर्वी गेट से प्रवेश करेंगे और गर्भगृह के पश्चिमी द्वार से बाबा का दर्शन करेंगे। दर्शन के बाद यात्री उसी रास्ते से वापस बाहर निकलेंगे।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम।
- फोटो : अमर उजाला
सावन के महीने में बाबा के धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए झांकी दर्शन की व्यवस्था रहेगी। मंदिर के चारों द्वार से शिवभक्तों को बाबा के दर्शन मिलेंगे और वहीं पर लगे पात्र के जरिए वह बाबा को जल अर्पित कर सकेंगे।
आदिविश्वेश्वर सावन के महीने में भक्तों पर अपनी कृपा की बरसात करेंगे। देश भर से शिवभक्त अपने आराध्य का दर्शन करने के लिए बाबा के दरबार पहुंचेंगे। सावन में यह पहला मौका होगा जब भक्त बाबा के काशी विश्वनाथ का भव्य दरबार और स्वर्णिम गर्भगृह का दर्शन कर सकेंगे। साथ ही गंगधार से गंगाधर की डोर को भक्त अपनी आस्था की डोर से भी जोड़ेंगे। सावन की शुरुआत 14 जुलाई से हो रही है और समापन 12 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा पर।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम
- फोटो : अमर उजाला
संपूर्ण सृष्टि के पालनहार और मृत्यु को हरने वाले देव महादेव शिव का सबसे प्रिय मास सावन की शुरूआत 14 जुलाई से होगी। भगवान आशुतोष को समर्पित इस माह में कांवड़िए गंगा जल से बाबा का अभिषेक करके अपनी मनोकामना की पूर्ति की कामना करते हैं। विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद सावन के महीने में पहला मौका होगा जब शिवभक्तों का रेला उमड़ेगा।