फिल्म अभिनेता संजय दत्त ने बुधवार को काशी में गंगा तट पर पिता सुनील दत्त और माता नरगिस समेत तीन पीढ़ी के पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। रानी घाट पर प्रशंसकों की उमड़ी भीड़ के बीच संजू बाबा ने जब पिंडदान शुरू किया, तभी झमाझम बारिश होने लगी। काशी के आठ पुरोहितों ने शंखनाद के बाद सस्वर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पिंडदान कराया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
बाबतपुर एयरपोर्ट से सिने स्टार संजय दत्त और सिने तारिका अदिति राव हैदरी अपनी आने वाली फिल्म ‘भूमि’ के अन्य कलाकारों के साथ दोपहर करीब 2:22 बजे रानी घाट पहुंचे। पं. राजेंद्र शर्मा के आचार्यत्व में पुरोहितों ने पहले शंखनाद दिया। इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ पिंडदान आरंभ हुआ।
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कुछ देर में ही बारिश होने लगी।इससे कुछ देर के लिए भागदौड़ मची लेकिन फिर बारिश थमते ही सब कुछ सामान्य हो गया। रानीघाट पर पिंडदान के लिए कोलकता से आए कारीगरों के द्वारा वातानुकूलित पंडाल और गेंदा, गुलाब के अलावा अन्य फूलों, रंगों से रंगोली बनाई गई थी। हरी घास, दूर्वा से पंडाल सजाया गया था।
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संजय दत्त ने अपनी मां नरगिस, पिता सुनील दत्त के साथ दादा- दादी और परदादा -दादी का पिंडदान किया। पिंडदान के बाद संजू बाबा ने 125 लीटर दूध से मां गंगा का अभिषेक किया। इसके बाद आरती उतारी। पिंडदान के बाद संजू बाबा ने पुरोहितों को दक्षिणा देकर विदा किया।
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सड़क मार्ग से होकर गंगा तट पहुंचे फिल्म स्टार संजय दत्त की झलक पाने के लिए प्रह्लाद घाट से रानी घाट तक प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी। घाट पर उन्हें देखते ही इंतजार में खड़े प्रशंसकों की भीड़ के बीच हरहर महादेव के उद्घोष गूंजने लगे।