धर्मनगरी काशी का क्या महत्व है? काशी विश्वनाथ धाम क्या है? शिवलिंग का उद्भव कैसे हुआ इन सभी बातों का विश्व भर में प्रचार-प्रसार करने के लिए ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव मंगलवार को सुबह अपने शिष्यों के साथ अति प्राचीन काशी करवत मंदिर पहुंचे। जहां उन्होंने योग साधना करने के बाद आदियोगी की पूजा की। आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव सत्संग के लिए काशी में कार्यक्रम के सिलसिले से सोमवार को काशी पहुंचे थे। उनके साथ आध्यात्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए देश-विदेश से उनके एक हजार के करीब अनुयायी भी आए हैं। देखें तस्वीरें...
बाबा विश्वनाथ को प्रणाम करते हुए उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम में ध्वस्तीकरण के बाद निकले प्राचीन मंदिरों को देखा। इस दौरान फिल्म अभिनेत्री जूही चावला और कंगना रानौत से काशी के महत्व काशी के उद्भव भगवान शिव शंकर को लेकर चर्चा की। चर्चा के बाद स्वामी जग्गी वासुदेव ललिता घाट स्थित नेपाली मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने गंगा के किनारे बैठकर फिल्म अभिनेत्री जूही चावला और कंगना राणावत द्वारा पूछे गए भगवान शिव और अविनाशी काशी पर आधारित प्रश्नों का उत्तर दिया। इसके बाद स्वामी जी काशी की गलियों से होते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 पर पहुंचे।
जहां उन्होंने मंदिर के मुख्य कार्यपालक विशाल सिंह और काशी विश्वनाथ धाम के लिए नियुक्त कंसलटेंट कंपनी के आर्किटेक्ट से भी उन्होंने चर्चा की और धाम के निर्माण के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसके बाद सद्गुरु पंचक्रोशी मार्ग स्थित रामेश्वर तीर्थ पहुंचे, जहां उन्होंने दर्शन पूजन करने के बाद वे एयरपोर्ट रवाना हो गए।
इससे पहले सोमवार को नदेसर स्थित होटल में गुरु जग्गी वासुदेव ने सत्संग के दौरान काशी के महत्व के बारे में अनुयायियों को बताया। उन्होंने कहा कि सात्विक ऊर्जा, ज्ञान और अध्यात्म की शक्ति से भरपूर इस नगरी में आकर बहुत ही ऊर्जावान महसूस करता हूं।
इस ज्ञान, ऊर्जा और प्रकाश को जीवन में उतारने का आह्वान किया। योगा सत्र के दौरान आदियोगी भगवान शिव की नगरी में शिष्यों ने आधुनिकता और प्राचीनता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। प्रांगण में आस्थावानों ने ईश्वर को स्मरण कर नाचते गाते हुए आपस में खुशियां साझा की।