कोरोना के नए रूप स्ट्रेन का संक्रमण कितना प्रभावी है, अब इस पर शोध की तैयारी चल रही है। इस बारे में सरकार ने जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रदेश में चार मेडिकल कॉलेजों का चयन किया गया है। इसमें वाराणसी का आईएमएस बीएचयू का नाम भी शामिल हैं। यहां माइक्रो बायोलॉजी लैब में संक्रमित मरीजों के सैंपल की जांच होगी। आइए अगली स्लाइड में जानते हैं क्या चल रही तैयारी...
कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण की चुनौती से अभी स्वास्थ्य विभाग निपटने में लगा ही है कि कोरोना के नए रूप स्ट्रेन का खतरा मंडराने लगा है। ब्रिटेन से शुरू इस संक्रमण का दायरा अब धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में अगर बात करें तो मेरठ में पहला केस मिलने के बाद अब तक यूपी में कुल 10 से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। इस नए संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने अब इसके संक्रमण की क्षमता के बारे में जांच कराने का फैसला लिया है।
इसमें कोरोना और स्ट्रेन के असर के सही कारणों की जांच हो सकेगी। इसके तहत स्ट्रेन के संक्रमित मरीजों का सैंपल प्रदेश के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में जांच के लिए भेजा जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश स्तर पर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिन मेडिकल कॉलेजों का चयन किया गया है, उसमें केजीएमयू लखनऊ, आईएमएस बीएचयू, सीडीआरआई लखनऊ के साथ एक अन्य मेडिकल कॉलेज हैं।
जांच की तैयारियां शुरू, सैंपल का इंतजार
आईएमएस बीएचयू माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. गोपाल नाथ ने बताया कि सरकार की ओर स्ट्रेन के संक्रमण के प्रभाव के बारे में सही जानकारी मिल सके इसलिए सैंपल की जांच कराई जा रही है। सरकार स्तर पर जानकारी मिलने के बाद से ही नियमानुसार सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। हालांकि अभी सैंपल कब से मिलेगा और जांच का क्या तरीका होगा, इस बारे में अभी कुछ भी बताना आसान नहीं होगा।
जिले में लौटे 49 लोगों की सेहत की हो रही मॉनिटरिंग
ब्रिटेन, नाइजीरिया, यूके समेत अन्य जगहों से स्ट्रेन के डर से लौटे 49 लोगों की सेहत की रोजाना मॉनिटरिंग की जा रही है। सहायक मलेरिया अधिकारी केके राय के नेतृत्व वाली टीम संबंधित मरीजों से फोन पर बातचीत कर उनका फीडबैक ले रही है। जिले में अब तक जितने लोग लौटे हैं सभी की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है।