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रंगभरी एकादशी: प्राचीन नगरी काशी के इस अनूठे रंगोत्सव का क्या है महत्व, पहली बार होगा ये काम

Wed, 01 Mar 2023 03:36 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 01 Mar 2023 03:36 PM IST
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Rangbhari Ekadashi 2023 in varanasi What is the importance of unique Rangotsav of Kashi
रंगभरी एकादशी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

पर्व-उत्सवों की नगरी काशी रंगभरी एकादशी पर तीन मार्च को अनूठे रंगोत्सव की साक्षी बनेगी। मौका होगा बाबा विश्वनाथ के गौने का। शिवभक्त बाबा की अगवानी में काशी की गलियों में गुलाल की होली खेलेंगे। विश्वनाथ गली अबीर-गुलाल की बौछार से लाल हो जाएगी। काशीपुराधिपति अपने नव्य-भव्य परिसर के स्वर्णिम गर्भगृह में माता पार्वती व प्रथमेश संग विराजेंगे और दर्शन देकर निहाल करेंगे। इसके बाद प्राचीन नगरी काशी में फगुनहट का रंग चटख हो जाएगा। पुराणों में ऐसा वर्णन मिलता है कि यही वह दिन है जब बाबा विश्वनाथ माता पार्वती से विवाह के बाद पहली बार काशी आए थे।  काशी में रंगभरी एकादशी का विशेष महत्व है। जिस तरह होलाष्टक से ब्रज में होली उत्सव शुरू होता है, उसी तरह काशी में रंगभरी एकादशी से होली पर्व की शुरुआत होती है।



काशी विश्वनाथ के दरबार में पहली बार बाबा को राजशाही पगड़ी अर्पित की जाएगी। काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ कुलपति तिवारी ने रंगभरी एकादशी पर नई पहल की है  बाबा विश्वनाथ की पालकी यात्रा को और खास बनाने के लिए मथुरा जेल में बंद छह कैदियों से खास गुलाल तैयार कराया जा रहा है। यह गुलाल अरारोट में सब्जियों को मिलाकर बनाया जा रहा है। अरारोट में पालक, मेथी और चुकंदर पीसकर डाला जा रहा है। इससे अलग-अलग रंग के गुलाल तैयार हो रहे हैं।
पढ़ें: रंगभरी एकादशी पर पहली बार बाबा विश्वनाथ दरबार में अर्पित होगी राजशाही पगड़ी, तैयारियां जोरों पर

Rangbhari Ekadashi 2023 in varanasi What is the importance of unique Rangotsav of Kashi
रंगभरी एकादशी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

रंगभरी एकादशी जिसका काशी में खासा महत्व है और हो भी क्यों नहीं इस दिन बाबा विश्वनाथ अपने ससुराल माता पार्वती की विदाई जो करने जाते हैं। अबीर-गुलाल के धमाल के बीच जब निकलेगी गौने की बरात तब समूची काशी शिवमय हो उठेगी। अबीर-गुलाल, ढोल-नगाड़े ,डमरू की थाप और शंखनाद से पूरा गोदौलिया-मैदागिन इलाका गूंज उठता है।
पढ़ें: बाबा विश्वनाथ की पगड़ी बना रहे गयासुद्दीन, इस बार अनूठे रंगोत्सव की साक्षी बनेगी काशी

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पालकी की साफ-सफाई करते भक्त - फोटो : अमर उजाला

तीन मार्च को रंगभरी एकादशी का पर्व जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है काशीवासियों में होली का खुमार चढ़ने लगा है। महंत आवास से लेकर बाबा दरबार तक तैयारियां अंतिम चरण में चल रही हैं। बाबा की पारंपरिक पालकी की साफ-सफाई शुरू हो गई है। राजा दरवाजा में शिव-पार्वती के राजसी परिधानों को तैयार किया जा रहा है। माता गौरा इस बार बरसाने की घाघरा पहनेंगी।

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रंगभरी एकादशी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

बाबा विश्वनाथ के गौना उत्सव के नियमित होने वाले लोकाचार मंगलवार से टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास पर माता गौरा के हल्दी तेल के साथ शुरू हो जाएंगे।

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रंगभरी एकादशी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

प्रतिवर्ष तेजी से बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए भगवान शिव की चल प्रतिभा के दर्शन के लिए इस बार नये नियम होंगे। कोई भी भक्त बाबा की पालकी को स्पर्श नहीं कर सकेगा। 

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