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रामनगर की रामलीला: एक हाथ में मानस पोथी दूसरे में छड़ी, जय सियाराम... के साथ 323 दिन बाद मिले नेमी; तस्वीरें

Sun, 07 Sep 2025 11:54 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 07 Sep 2025 11:54 AM IST
सार

Ramnagar Ramlila 2025: काशी नगरी में विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला का पारंपरिक शुभारंभ हो गया। 323 दिन बाद मिले नेमियों ने जय सियाराम...के उद्घोष के साथ एक-दूसरे का हाल जाना। एक महीने तक रामनगर लीला प्रेमियों से गुलजार रहेगा।

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Ramnagar Ramlila Nemi found after 323 days with Manas book in one hand stick in other Jai Siyaram
रामनगर की रामलीला में क्षीर सागर की सजी झांकी। - फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)

कंधे पर झोला, एक हाथ में मानस पोथी तो दूसरे में छड़ी और नजरें लीला के इंतजार में शुभ घड़ी पर गड़ी थीं। 323 दिन के पर नेमियों का एक दूसरे से सामना हुआ तो हाथ जुड़े और रामरम्मी से अभिवादन किया। जयसियाराम भइया.. के साथ अंकवार में समेटा और रामलीला शुरू होने से पहले ही भरत मिलाप दृश्य सजीव हो उठा। 

Ramnagar Ramlila Nemi found after 323 days with Manas book in one hand stick in other Jai Siyaram
रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के मंचन से पूर्व। - फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)

शनिवार को काशी का उपनगर रामनगर राममय हो उठा। रंगकर्म के बजाय अध्यात्म-धर्म से सराबोर दुनिया के विशालतम और अनूठे मुक्ताकाशीय रंगमंच का पर्दा संपूर्ण विधि विधान और अनुष्ठान के साथ उठ गया। श्रद्धा के अनगिनत भावों से सजा रामबाग क्षीरसागर में तब्दील हुआ और इसमें शेष शैय्या पर श्रीहरि ने दर्शन दिए। 

Ramnagar Ramlila Nemi found after 323 days with Manas book in one hand stick in other Jai Siyaram
विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में जुटी भीड़। - फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)

लीला का आरंभ रावण जन्म प्रसंग से हुआ और उसने भाइयों समेत घोर तप किया। भगवान ब्रह्मा से अभय का वरदान पाने के अहंकार में रावण ने विश्वकर्मा द्वारा बनाए स्वर्ण महल पर आक्रमण तो किया ही ब्राह्मणों के यज्ञ व हवन में विघ्न भी डालना शुरू कर दिया। 

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Ramnagar Ramlila Nemi found after 323 days with Manas book in one hand stick in other Jai Siyaram
जयकारे लगाते लीला देखने आए भक्त। - फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)

मेघनाद ने तो इससे आगे बढ़ते हुए देवराज इंद्र को बंदी बना लिया और इंद्रजीत का अलंकरण पाया। श्वेत महताबी की रोशनी से नहाए रामबाग पोखरे ने क्षीरसागर का रूप लिया और शेष शैय्या पर लेटे श्रीहरि की झांकी निखर उठी। 

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Ramnagar Ramlila Nemi found after 323 days with Manas book in one hand stick in other Jai Siyaram
लीला में शामिल होने जाते पात्र। - फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)

लीला स्थल पहुंचे पंच स्वरूप : रामलीला से पहले दोपहर दो बजे पंच स्वरूपों का व्यासगणों की निगरानी में साज शृंगार किया गया। विधि विधान से मुकुट पूजन कर धारण कराया गया। चार बजे उन्हें कंधे पर बैठाकर दुर्ग पहुंचाया गया। रस्म पूरी कर बैलगाड़ी से उन्हें लीला स्थल ले जाया गया। 

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