ईशान कोण से दिखने लगा काशी विश्वनाथ का स्वर्ण शिखर, माघी पूर्णिमा पर पीएम करेंगे दर्शन
जहां कभी ऊंची इमारतों के चलते काशी विश्वनाथ के मंदिर का शिखर देखना मुश्किल था, वहीं काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के चलते अब मंदिर का स्वर्ण शिखर ईशान कोण से दिखने लगा है। वहीं बाबा के मंदिर का दर्शन दूर से ही किया जा सकता है। मंदिर का का गुंबद अब अपने पूरे ओज के साथ चमक रहा है। जिसमें विराजमान बाबा के दर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) 19 फरवरी को करेंगे।
सोमवार को मंदिर के पास जेसीबी ने पुराने स्टेट बैंक वाले भवन को गिरा दिया। इससे मंदिर परिसर दिखने लगा है। प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर भी तैयारियां तेज हो गई हैं। इसलिए कॉरिडोर में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है।
काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर मणिकर्णिका घाट और मीरघाट से लेकर मंदिर तक 25 हजार वर्ग मीटर में बनने वाले कॉरिडोर के लिए 204 भवन खरीद लिए गए हैं। अब इन भवनों के ध्वस्तीकरण का कार्य चल रहा है।
अब तक 100 भवन पूरी तरह से गिरा दिए गए हैं। बाकी के सभी भवनों के गिराने का काम तेजी से चल रहा है। मंदिर कॉरिडोर के कार्य को देखने के लिए खुद प्रधानमंत्री 19 को आएंगे।
क्यों है ईशान कोण का महत्व
वैसे तो शंकर भगवान का एक नाम ईशान भी है। वहीं मंदिर में बाबा विश्वनाथ स्वयं ईशान कोण में ही मां पार्वती के संग विराजमान हैं। इसलिए मंदिर का ईशान कोण से दर्शन करना काफी फलदाई माना गया है। ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र के अनुसार वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। इन दोनों दिशाओं के मिलन का कोण ही ईशान कहलाता है। इस कोण का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इस क्षेत्र में देवताओं के गुरु बृहस्पति और मोक्ष कारक केतु का भी वास होता है।
17 तक संवर जाएगा कॉरिडोर
प्रधानमंत्री के आगमन से पहले मंदिर क्षेत्र में ध्वस्त किए भवनों का मलबा हटा दिया जाएगा। इससे कॉरिडोर साफ-सुथरा दिखेगा। मंदिर प्रशासन के अनुसार 19 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) कॉरिडोर देखने आ सकते हैं। ऐसे में मलबा हटाने का काम तेज कर दिया है। साथ सड़कों के गड्ढे भर कर मरम्मत की जाएगी। एसडीएम विनोद सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। मजदूरों की संख्या बढ़ाकर काम गति तेज करा दी गई है। इस क्षेत्र को साफ-सुथरा किया जा रहा है।