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PHOTOS : जलती चिताओं के बीच नगर वधुओं ने सजाई नृत्य की महफिल

Mon, 26 Mar 2018 10:19 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 26 Mar 2018 10:19 AM IST
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Nagarvadhu dance in varanasi last night
nagarvadhu - फोटो : अमर उजाला
शिव की नगर काशी में बीती रात जलती चिताओं के बीच नगर वधुओं ने नृत्य से महफिल सजाई। मणिकर्णिका घाट पूरी रात घुंघरूओं की झनकार से गूंजता रहा। इस महफिल ने बरबस ही हर किसी का ध्यान खींचा। साढ़े तीन सौ साल की परंपरा के तहत नगर वधुओं ने बाबा मशाननाथ के दरबार में नृत्य की भावांजलि प्रस्तुत की। आगे की स्लाइड्स में देखें...


 
Nagarvadhu dance in varanasi last night
nagarvadhu - फोटो : अमर उजाला
नृत्य के भावों से नगर वधुओं ने बाबा से प्रार्थना की वर्तमान जीवन की बुराईयां अगले जन्म में हमारे साथ लौटकर न आएं, इसके लिए हम अपनी नृत्य की साधना आपको अर्पित करते हैं। देर रात से शुरू हुआ यह आयोजन मंगला आरती तक चला। शनिवार को महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर नगर वधुओं ने बाबा मशाननाथ के दरबार में नृत्य की महफिल सजाई। 

 
Nagarvadhu dance in varanasi last night
nagarvadhu - फोटो : अमर उजाला
सैकड़ों साल की पुरानी परंपरा को नगरवधुओं ने जीवंत करते हुए भोर तक गीतों की धुन पर अपने नृत्य के जलवे दिखाए। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम का आरंभ ऊं नम: शिवाय की धुन से किया। इसके बाद उन्होंने आंखों का ये काजल..., पियवा से पहिले हमार रहलू... समेत कई फिल्मी और भक्ति गीतों पर नृत्य पेश किए। नवरात्रि की सप्तमी को नगर वधुओं ने बाबा मशाननाथ को इसी कामना के साथ खुश करने की कोशिश की कि उनका भी आने वाला कल और अगला जन्म बेहतर हो और उन्हें भी परिवार का प्यार मिले। 

 
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Nagarvadhu dance in varanasi last night
nagarvadhu - फोटो : अमर उजाला
दर्शक भी मंगला आरती तक नृत्य देखने के लिए महाश्मशान में डटे रहे। शनिवार की शाम 5 बजे मंदिर में शृंगार के पश्चात रात्रि साढे़ आठ बजे से नगर वधुओं ने नृत्यांजलि पेश की। तीन दिवसीय महोत्सव के अंतिम दिन बाबा महाश्मशान नाथ का विधि विधान से पूजन किया और महाआरती बाद नगर वधुओं का नृत्य शुरू हुआ जो मंगला आरती तक जारी रहा। 

 
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Nagarvadhu dance in varanasi last night
nagarvadhu - फोटो : अमर उजाला
कहते हैं कि इस महाश्मशान पर चिता की आग कभी ठंडी नहीं होती। दूर-दूर से लोग यहां अपनों के अंतिम संस्कार के लिए आते हैं। मान्यता है कि काशी के इस महाश्मशान पर खुद बाबा विश्वनाथ मृतक के कानों में तारक मन्त्र बोलकर उसे मुक्ति प्रदान करते हैं। इस महाश्मशान के अधिष्ठाता देव बाबा मशाननाथ के दरबार में नाच रही नगर वधुएं भी मुक्ति की ऐसी ही कामना के साथ यहां हर वर्ष आती हैं और मुक्ति अपने जीवन के इस कलंक से हैं।

 
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