वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र के एक मकान में बुधवार को मां-बेटी के निर्वस्त्र हालत में सड़ चुके शव मिले। करीब 11 दिन तक मकान में दो लाश पड़ी रही और किसी को भनक तक नहीं लगी। अगर दुर्गंध नहीं उठती तो शायद किसी को घटना की जानकारी नहीं हो पाती। घटना को लेकर लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं। कोई संपत्ति विवाद को घटना की वजह बता रहा तो कोई लूट की नीयत से हत्या होने की चर्चा कर रहा है। ऐसे में पुलिस के लिए घटना की गुत्थी सुलझाना चुनौती होगी।
मूल रूप से देवरिया के रहने वाले बालमुकुंद बिजली विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे। दो साल पहले उनकी मौत हो गई थी। आसपास के लोगों के मुताबिक बालमुकुंद पांडेय का बड़ा बेटा अखिलेश दिल्ली रहता है। छोटा बेटा अंजनी इस समय चोलापुर में एक पोल्ट्री फार्म चलाता है। मकान में बालमुकुंद की पत्नी सुनीता पांडेय (55) और बेटी दीपिका पांडेय (28) रहती थीं। पुलिस के अनुसार सुनीता का शव कमरे में पड़ा था, जबकि बेटी दीपिका पांडेय का शव बरामदे में था। उनके शरीर पर कपड़े नहीं थे।
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नरिया प्राथमिक विद्यालय के पास मकान में मिले मां-बेटी के शव
- फोटो : अमर उजाला
नरिया प्राथमिक विद्यालय के पास जिस मकान में मां-बेटी की लाश मिली है, उसका दो तरफ का हिस्सा गिराया जा चुका है। इस घर में कोई भी आसानी से जा सकता है। पिता के निधन के बाद मकान का बंटवारा हुआ और जब मकान गिर गया तो बड़े बेटे अखिलेश ने अपना हिस्सा बेच दिया। मां पेंशन से मिलने वाली धनराशि से अपना और बेटी का गुजारा कर रही थी। घटना की सूचना भी पुलिस को छोटे बेटे अंजनी ने दी और वह घर पर भी गया था।
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नरिया प्राथमिक विद्यालय के पास मकान में मिला मां-बेटी का शव
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उधर, डीआईजी संतोष सिंह, डीसीपी काशी आरएस गौतम ने महिला छोटे बेटे अंजनी पांडेय से बंद कमरे में घंटे भर पूछताछ की। बेटे से पूछताछ के दौरान किन बातों पर बातचीत हुई यह तो डीआईजी ने नहीं बताया। बस इतना कहा कि पुलिस अलग-अलग एंगल से इस घटना की जांच करेगी। पुलिस नरिया तिराहे से घटना स्थल तक की सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।
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नरिया प्राथमिक विद्यालय के पास मकान में मिले मां-बेटी के शव
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तीन दिन पहले दिल्ली में रहने वाले बड़े बेटे ने संकट मोचन चौकी प्रभारी को फोनकर मां का फोन नहीं उठाने की जानकारी दी थी। इस पर डीआईजी ने कहा जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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नरिया प्राथमिक विद्यालय के पास मकान में मिले मां-बेटी के शव
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डीआईजी ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि एक लाख रुपये छोटे बेटे के खाते में 7 जुलाई को किसी ने भेजा था। तीन जुलाई को वह घर भी आया था। इसलिए घटना संदेहास्पद लग रही है। इधर घर में तीन जुलाई से अब तक के हर दिन के अखबार भी एक ही जगह पड़े थे।