मौनी अमावस्या पर बुधवार को 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। वहीं, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किए।
2 of 5
Mauni Amavasya 2025
- फोटो : अमर उजाला
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए सड़कों पर 2 किमी तक लंबी लाइनें लगी थी। दशाश्वमेध घाट से लेकर गोदौलिया और गिरिजाघर चौराहे तक आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी गई थी। मैदागिन इलाके में भक्तों की कतार बुलानाला तक तो गंगा द्वार वाली लाइन त्रिपुरा भैरवी घाट तक लगी रही।
3 of 5
Mauni Amavasya 2025
- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा काशी विश्वनाथ मंदिर के सभी छह गेट पर भक्तों की भारी भीड लगी रही। मंगला आरती से शयन आरती तक निर्वाध रूप से बावा विश्वनाथ मंदिर में भक्तों की 3-4 कतारें चलती रहीं। पिछले सात दिनों में 38 लाख लोगों ने बाबा के दर्शन किए हैं। पुलिस प्रशासन के अनुसार, बुधवार को गंगा के सभी 84 घाटों पर 10 लाख से अधिक लोगों ने स्नान किया।
4 of 5
Mauni Amavasya 2025
- फोटो : अमर उजाला
ये है गंगा स्नान का महत्व
मौनी अमावस्या पर मान्यतानुसार पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। गंगा तट पर इसी कारण श्रद्धालु एक महीने तक कुटी बनाकर गंगा स्नान और ध्यान करते हैं। इस मास में संगम स्नान अन्य युगों से अनंत पुण्यदायी होता है। इस तिथि को पवित्र नदियों में स्नान के पश्चात अपने सामर्थ्य के अनुसार दान देना चाहिए। इस दिन तिल दान भी उत्तम कहा गया है। इस तिथि को मौनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है अर्थात मौन अमवस्या। चूंकि इस व्रत में व्रत करने वाले को पूरे दिन मौन व्रत का पालन करना होता इसलिए यह योग पर आधारित व्रत कहलाता है।
5 of 5
Mauni Amavasya 2025
- फोटो : अमर उजाला
ये करें दान
मौनी अमावस्या पर मौन रखकर स्नान-दान करना चाहिए। ज्योतिषविद विमल जैन के अनुसार चावल, दूध, मिश्री, चीनी, खोवे से बने सफेद मिष्ठान, सफेद वस्त्र, चांदी और अन्य सफेद रंग की वस्तुएं दक्षिणा के रूप में देनी चाहिए। यदि ब्राह्मण को भोज न करवा सकें तो उन्हें भोजन सामग्री के साथ नकद द्रव्य देकर पुण्य लाभ प्राप्त करना चाहिए।