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जानलेवा बीमारी ‘एमएनडी’ से आगाह करेगी यह फिल्म, मानुषी छिल्लर के हाथों रिलीज कराने की तैयारी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 11 Dec 2017 03:49 PM IST
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नसों को गला देने वाली भयावह बीमारी ‘मोटर न्यूरॉन डिजीज’ (एमएनडी) पर अभी तक दवा भले नहीं बन सकी लेकिन इसके खतरे से आगाह करने के लिए डाक्यूमेंट्री फिल्म बनकर तैयार है। ‘द डाइंग मैन एंड हिज डाइंग सिटी’ डाक्यूमेंट्री को बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. वीएन मिश्र के निर्देशन में तैयार किया है नरेंद्र आचार्य ने। मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर के हाथों इस डाक्यूमेंट्री को रिलीज कराने की तैयारी है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें....
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18 मिनट की इस डाक्यूमेंट्री की शूटिंग मणिकर्णिका घाट, तुलसी घाट के अलावा बीएचयू रामनगर, वरुणा, असि और गंगा के तटों पर की गई है। इसमें मणिकर्णिका के मोक्ष की अवधारणा से लोग परिचित होंगे। तिल तिल कर मरता हुआ एक आदमी भी इस डाक्यूमेंट्री में दिखेगा और मरता हुआ उसका शहर भी।
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इस फिल्म का नायक अपनी जिंदगी से जूझने के साथ ही अपने शहर के हाल की भी फिक्र करता दिखेगा। इस डाक्यूमेंट्री में बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने भी काम किया है। बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. वीएन मिश्र ने कहा कि इस डाक्यूमेंट्री को बनाने का उद्देश्य है कि इस बीमारी के बारे में लोग जान जाएं।
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26 जनवरी को इस डाक्यूमेंट्री को बीएचयू में महामना को समर्पित किया जाएगा। इस डाक्यूमेंट्री में मणिकर्णिका महाश्मशान पर मोक्ष की अवधारणा भी दिखेगी और रामनगर किले के वैभव से लेकर और महामना की कर्मस्थली बीएचयू में कर्तव्य पथ पर बढ़ने की प्रेरणा भी।
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धीरे-धीरे नसों को गलाकर मौत की नींद सुलाने वाली बीमारी मोटर न्यूरॉन डिजीज के आंकड़े भी कम चौंकाने वाले नहीं है। बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. वीएन मिश्र से इस बीमारी से पीड़ित 543 लोग इलाज करवा रहे हैं। अब तक कोई कारगर दवा न होने की वजह से उनकी जिंदगी बचेगी या नहीं, यह कह पाना तो मुश्किल है लेकिन बीमारी के प्रति लोगों को इस डाक्यूमेंट्री के जरिए सावधान किया जाएगा।