करपात्री महाराज की तपोस्थली धर्मसंघ परिसर में मणि मंदिर साकार हो चुका है। 28 फरवरी को देवालय संकुल में प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद मंदिर श्रद्धालुओं को समर्पित कर दिया जाएगा। प्रभु श्रीराम दरबार की झांकी सहेजे यह मंदिर आठ दशक पहले 1940 में स्थापित किया गया था। शैव और वैष्णव की एकता का प्रतीक यह मंदिर सभी के लिए आकर्षण का केंद्र होगा।
मंदिर का निर्माण लगभग 43 हजार वर्गफीट में किया गया है। इसमें भगवान राम के दरबार के साथ ही शिव, शक्ति और पंचदेवों के दर्शन एक साथ हो जाएंगे। राम दरबार के ठीक सामने विशाल मंडप के मध्य पांच फीट आकार वाला शिवलिंग है तो दोनों तरफ 151 नर्मदेश्वर शिवलिंगों की कतार है।
बगल में शिव परिवार और स्फटिक मणि के द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन होंगे। परिक्रमा पथ पर अगले हिस्से में सूर्यदेव व बाबा कालभैरव और पिछले हिस्से में एक तरफ गजानन तो दूसरी तरफ मां दुर्गा अभयदान की मुद्रा में कृपा बरसाएंगी। राम दरबार के बगल में मां अन्नपूर्णा श्रद्धालुओं को धन-धान्य का वरदान देंगी।
धर्मसंघ के सचिव जगजीतन पांडेय ने बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों के निर्माण में स्फटिक मणि के इस्तेमाल के कारण 11 शिखरों वाले इस मंदिर को मणि मंदिर नाम दिया गया है। मंदिर का निर्माण जोधपुर और चुनार के लाल पत्थरों से किया गया है। भीतर की दीवारों को श्वेत संगमरमर और फर्श को ग्रेनाइट से सजाया गया है।
दस देवियां देंगी भय-बाधा से मुक्ति
धर्मसंघ परिसर में बने देवालय में दस महाविद्याएं यानी तंत्र साधना की दस देवियां भय-बाधाओं से मुक्ति का आशीष बरसाएंगी। इनमें मां भगवती, काली, तारा, श्रीविद्या, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला का दरबार सजेगा।