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महावीर जयंती पर विशेषः जैनियों के चार तीर्थंकरों ने लिया था पावन काशी में जन्म

Thu, 29 Mar 2018 04:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 29 Mar 2018 04:50 PM IST
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mahavir jayanti special there are four jain tirthankara born in kashi
jain - फोटो : अमर उजाला
वैदिक आस्था का प्रतीक और देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी जैन धर्म की भी पावन स्थली रही है। जैन धर्म के चार तीर्थंकरों ने यहां जन्म लिया। कहते हैं, तीर्थंकरों के जन्म से पहले काशी में लगातार 15 माह तक रत्न वृष्टि हुई थी। काशी में कई जैन मंदिर है जहां जैनियों की आस्था का विचरण करती है। इनमें ही एक नरिया और दूसरा अर्दली बाजार में महावीर स्वामी जी का मंदिर है जहां 24वें तीर्थंकर महावीर जी विराजमान हैं। महावीर जयंती के मौके पर शहर के इन मंदिरों में विविध आयोजन हो रहे हैं।  आगे की स्लाइड्स में देखें...



 
mahavir jayanti special there are four jain tirthankara born in kashi
jain - फोटो : अमर उजाला
जैन धर्म के सातवें तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ, आठवें तीर्थंकर चंद्र प्रभु, 11वें तीर्थंकर श्रेयांस नाथ और 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ की जन्मस्थली होने का गौरव इस नगरी को मिला। यहां के उपवनाें में चारों तीर्थंकरों ने ज्ञान की खातिर तप साधना की थी। इनके पवित्र कदमों से सिंचित यह नगरी इन धर्मावलंबियों के लिए श्रद्धा का केंद्र है। 


 
mahavir jayanti special there are four jain tirthankara born in kashi
jain - फोटो : अमर उजाला

  
अहिंसा परमो धर्म: का संदेश देने वाले 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की पूजा तो हर जैन मंदिर में होती है, लेकिन नरिया पर उनका खास मंदिर है। महावीर स्वामी के इस श्री दिगंबर जैन मंदिर की स्थापना 1947 में मार्च के महीने में हुई थी। वहीं अर्दलीबाजार स्थित महावीर मंदिर की स्थापना राजा अर्जुन ने कराई। 

 
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jain - फोटो : अमर उजाला
करीब पचास हजार जैनियों के आबादी वाले इस शहर में 24 में से चार तीर्थंकरों का जन्मस्थान होना बहुत ही खास है। इनमें 23वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ जैन तीर्थ का जन्मस्थान सबसे खास है। भेलूपुर में 2880 साल पहले काशी के महाराज अश्वसेन के दिव्यमहल में उनका जन्म हुआ। 

 
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mural art - फोटो : अमर उजाला
इसी तरह सातवें तीर्थंकर श्री सुपार्श्वनाथ भगवान का जन्मस्थान भदैनी में पवित्र गंगा तट पर है। यही उनके जन्म, कर्म और तप की स्थली है। गंगा घाट किनारे ही उनके दो मंदिर हैं। एक प्रभु घाट और दूसरा जैन घाट पर। वहीं आठवें तीर्थंकर चंद्र प्रभु का जन्मस्थान चौबेपुर के पास चंद्रावती गांव है। ये भी गंगा किनारे ही जन्मे। 

 
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