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चंद्र ग्रहण का असर, वाराणसी में फिर टूटी परंपरा, दोपहर में हुई विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 28 Jul 2018 10:08 AM IST
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दी के सबसे लंबे चंद्र ग्रहण के सूतक काल के कारण आध्यात्मिक राजधानी कही जाने वाली काशी में सायंकालीन दैनिक गंगा आरती की पंरपरा 26 साल बाद एक बार फिर टूट गई। गंगा सेवा निधि की ओर से दशाश्मेध घाट पर आयोजित होने वाली आरती शुक्रवार को शाम की बजाए दोपहर 1:15 बजे हुई। गंगा आरती में देसी-विदेशी पर्यटकों समेत हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने बताया कि 26 सालों के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब गंगा आरती एक बजे दिन में हुई, इससे पहले पिछले वर्ष श्रावण पूर्णिमा के दिन सात अगस्त 2017 को दिन में 12 बजे आरती की गई थी। आरती में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु घाट पर पहुंचे।
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सुशांत मिश्र के मुताबिक,हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण से पूर्व सूतक लग जाता है। ऐसे में चंद्रग्रहण के नौ घंटे पहले ही सभी धार्मिक कार्यों पर रोक लग जाती है।
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सावन महीना शुरू होने के ठीक एक दिन पहले चंद्र ग्रहण का सूतक लगने के साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर, संकटमोचन मंदिर, मां अन्नपूर्णा मंदिर सहित अन्य मंदिरों के कपाट शुक्रवार दोपहर में ही बंद हो गए। अब वाराणसी आने वाले श्रद्धालुओं और कांवरियों को बाबा विश्वनाथ का दर्शन दूसरे दिन भोर में मंगला आरती के बाद ही मिल सकेगा
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चंद्र ग्रहण के मौके पर गंगा स्नान के लिए घाटों पर भीड़ उमड़ी है। बता दें कि आज की रात होने वाला चंद्रगहण 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण माना जा रहा है। इसकी कुल अवधि 6 घंटा 14 मिनट रहेगी। इसमें पूर्णचंद्र ग्रहण की स्थिति 103 मिनट तक रहेगी।