शहादत के बाद जब अश्वनी कुमार यादव का पार्थिव शरीर घर गाजीपुर में उनके पैतृक गांव चकदाउद पहुंचा तो परिजनों के साथ ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गईं। पार्थिव शरीर के घर पहुंचते ही गगनभेदी नारा लगा रहे लोगों की आंखें झर-झर बह रही थीं। सेना की वर्दी में आए जवानों के कंधे पर ताबूत में रखे शहीद के पार्थिव शरीर को लोग छूने की कोशिश में लगे थे। गांव वालों ने घर के बाहर वंदे मातरम, भारत माता की जय के नारे लगाए। पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा तो आला अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। देखें अगली स्लाइड्स...
जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा सोमवार को आतंकी हमले में शहीद हुए गाजीपुर के अश्वनी कुमार यादव का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे वाराणसी एयरपोर्ट पर पहुंचा था। यहां पर सीआईएसएफ कमांडेंट सुब्रत झा समेत आला अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। इसके बाद करीब दस बजे सड़क मार्ग से गाजीपुर में पैतृक गांव के लिए रवाना हो गया।
दो दिन बाद जब बुधवार करीब साढ़े 11 बजे शहीद अश्वनी का पार्थिव शरीर उनके गांव चकदाउद में घर पहुंचा तो परिजनों समेत वहां मौजूद लोगों की आंखें नम थीं। शहीद का पार्थिव शरीर मंगलवार शाम को पहुंचना था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण चार्टर्ड प्लेन नहीं आ सका। जम्मू-कश्मीर से सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा शहीद का शव दिल्ली पहुंचा। तभी आंधी और बारिश की सूचना मिलने पर आगे की यात्रा स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद बुधवार सुबह पार्थिव शरीर बनारस पहुंचा, उसके बाद गाजीपुर में लाया गया।
इस मौके पर जिलाधिकारी ओम प्रकाश आर्य ने शहीद के परिजनों को 50,00000 रुपये देने की घोषणा की। साथ ही शहीद के परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी और शहीद के नाम से गांव की सड़क बनाए जाने को कहा। गाजीपुर जिले के नोनहरा थाना क्षेत्र के चकदाउद गांव निवासी राम सिंह के बेटे शहीद अश्वनी कुमार के पार्थिव शरीर का परिवार समेत पूरा क्षेत्र इंतजार कर रहा था। शहीद के परिजनों को सांत्वना देने के लिए जिले के आला अधिकारी भी मंगलवार की रात घर पहुंच गए थे।
शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग शहीद के गांव चकदाउद में सुबह ही मौजूद हैं। लॉकडाउन के बावजूद आम जनता के साथ सभी दलों के जनप्रतिनिधि तक मौजूद हैं। शहीद के सम्मान में आसपास के बाजार बंद रहे।