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काशी के कलाकारों का हुनर, खूबसूरती में चार चांद लगा रही गुलाबी मीनाकारी 

Fri, 24 Nov 2017 10:31 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Fri, 24 Nov 2017 10:31 AM IST
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Kashi sculpture attract tourists
गुलाबी मीनाकारी - फोटो : अमर उजाला
सोने-चांदी से निर्मित आभूषण हों या सजावटी सामान, इन सबकी खूबसूरती में चार चांद लगा रही है गुलाबी मीनाकारी। काशी की विलुप्त होती मगर इस खास शिल्पकला की चमक बनारस के दीनदयाल हस्तकला संकुल में बिखर रही है। यह कला पर्यटकों और खरीदारों को आकर्षित कर रही है। आगे स्लाइड्स में देखें तस्वीरें... 
Kashi sculpture attract tourists
गुलाबी मीनाकारी - फोटो : अमर उजाला
जीआई सर्टिफिकेशन के बाद इस कला और शिल्प के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। गुलाबी मीनाकारी आभूषणों, सजावटी सामान विशेषकर हाथी, घोड़े, ऊंट, चिड़िया, मोर तथा चांदी के बर्तनों आदि पर की जाती है। प्राचीन काल में राजे-रजवाड़ों के मुकुट, छत्र, वस्त्र और रत्नजड़ित आभूषण पहनने की परंपरा ने इस कला को बढ़ावा दिया। मुगलकाल में यह कला बनारस में और भी तेजी से बढ़ी। अब इस कला के कारीगर कम हो रहे हैं।
 
Kashi sculpture attract tourists
गुलाबी मीनाकारी - फोटो : अमर उजाला
काशी में लगभग 50 कारीगर ही अब इस परंपरा को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। बनारस के पक्के महाल की तंग गलियों में कुछ बुजुर्ग कारीगर यह बारीक काम करते देखे जा सकते हैं। हालांकि जीआई पंजीकरण के बाद से अब युवा शिल्पी भी इस कला को आगे बढ़ाने के लिए इसकी बारीकियां सीख रहे हैं। गुलाबी मीनाकारी का काम खास तौर पर भैरव गली, आस भैरव, गाय घाट आदि इलाकों में होता है। यहां से गुलाबी मीनाकारी के सामान जयपुर, मुंबई और बंगलूरू तथा दिल्ली के अलावा यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों तक जाते हैं।। 
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गुलाबी मीनाकारी - फोटो : अमर उजाला
गुलाबी मीनाकारी का सालाना कारोबार करीब 10-12 करोड़ रुपये का है। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित स्व. मोहनलाल एवं उनके पूर्वज इस काम के जाने-माने कलाकार रहे। अब युवा पीढ़ी के चुने हुए कारीगर यह काम कर रहे हैं। धातु के गहनों, सामान या बर्तनों की ऊपरी सतह करीने से रंगने के बाद उन पर गुलाबी मीनाकारी का काम किया जाता है। 
 
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गुलाबी मीनाकारी - फोटो : अमर उजाला
गुलाबी रंग चढ़ाने की तकनीक के ही कारण यहां की मीनाकारी दुनिया में मशहूर है। इसमें कीमती रत्नों को सोने और चांदी के आभूषणों में जड़ने का काम छोटे-छोटे औजारों के प्रयोग से अत्यंत बारीक ढंग से किया जाता है। पहले चांदी और सोने के आभूषणों की गढ़ाई फिर थड़ाई और अंत में जड़ाई होती है। प्राचीन काल में आभूषणों में रत्न लगाने के लिए किसी केमिकल या गोंद का प्रयोग नहीं होता था। उन्हें इसी तकनीक से जड़ा जाता था
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