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काशी पंचक्रोशी यात्रा: पांचों पांडव मंदिर बना रेस्टोरेंट, एक धर्मशाला बन गई विद्यालय तो दूसरा बना बारात घर

Sun, 20 Sep 2020 04:38 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 20 Sep 2020 04:38 PM IST
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Kashi Panchkroshi Yatra: Five Pandava temples became restaurant, one Dharamshala became a school and another became a wedding procession
पांचों पांडव मंदिर के पास हुआ अतिक्रमण। - फोटो : अमर उजाला

वाराणसी में पंचक्रोशी यात्रा के चौथे पड़ाव शिवपुर की तो अजब कहानी है। मंदिर से लेकर धर्मशालाओं तक पर अवैध कब्जा है। पांचों पांडव का मंदिर जहां रेस्टोरेंट में तब्दील हो चुका है तो धर्मशाला में विद्यालय कई सालों से संचालित हो रहा है। वहीं एक धर्मशाला को बारात घर बना दिया गया है। रामेश्वर के बाद पांचों पांडव पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों को सबसे पहले मंदिर और धर्मशाला खोजना होगा।

Kashi Panchkroshi Yatra: Five Pandava temples became restaurant, one Dharamshala became a school and another became a wedding procession

मंदिर के परिसर में ही रेस्टोरेंट का संचालन किया जा रहा है। द्वापर युग से जुड़ा यह मंदिर का अस्तित्व अब समाप्त होने की कगार पर पहुंच चुका है। रामेश्वर के बाद पांचों पांडव पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों को तो सबसे पहले मंदिर खोजने के लिए ही परेशान होना पड़ेगा। मंदिर के प्रवेशद्वार पर खुली दुकानों के कारण कोई भी नहीं कह सकता है कि पांचों पांडव का मंदिर यही है। जिला प्रशासन ने इन दुकानों को हटवाने का निर्देश दिया था, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हो सकी है।

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मिलेगी थोड़ी राहत 
रामेश्वर से शिवपुर स्थित पांचों पांडव के बीच की 13 किलोमीटर की दूरी में यात्रियों को इस बार थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। रास्ते में जगह-जगह वन विभाग द्वारा लगवाए गए पौधे अब पेड़ बन गए हैं।

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अभी पटरियों का निर्माण अधूरा
रामेश्वर से शिवपुर के रास्ते में अभी सड़कें और तीर्थयात्रियों के लिए पटरियों का निर्माण अधूरा ही है। पंचक्रोशी के परिक्रमा पथ पर कई जगह पटरियों का काम अधूरा छोड़ दिया गया है तो कहीं-कहीं मजदूर काम भी कर रहे हैं। हरहुआ से शिवपुर की तरफ आगे बढ़ते ही कई जगह सड़क पर गड्ढे हो चुके हैं।

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धर्मशाला बनी पुलिस चौकी। - फोटो : अमर उजाला

धर्मशालाओं पर हैं किसी न किसी का कब्जा 
कहने को तो शिवपुर में छह धर्मशालाएं हैं, लेकिन इसमें सभी पर किसी न किसी ने कब्जा कर रखा है। कोतवाल आलम सिंह, राजा गोकुल चंद्र धर्मशाला, मिर्जापुर धर्मशाला का नाम भी अब लोग भूल चुके हैं। कहीं विद्यालय, कहीं बारातघर तो कुछ धर्मशालाओं का तो व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है।

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