‘‘शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा..।’’ कारगिल युद्ध हुए 21 साल बीते गए। आज भी हम कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। इन शहीदों के घर-आंगन में आज भी मायूसी है। परिजनों को वीर सपूतों की शहादत पर गर्व है, लेकिन उनको खोने का मलाल भी है।
CourageInKargil : लहुरीकाशी ने भी गंवाए थे जांबाज बेटे, अब भी लोगों के दिलों में धड़कते हैं कारगिल शहीद
कारगिल की लड़ाई में लहुरीकाशी (गाजीपुर) के वीर सपूतों ने भी वतन की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए थे। इन जांबाज जवानों में धनईपुर के संजय सिंह यादव, पड़इनिया के रामदुलार यादव, पंडितपुरा के जयप्रकाश यादव और पखनपुरा के इश्तियाक खान, भैरोपुर के कमलेश सिंह, बाघी के शेषनाथ सिंह यादव का नाम गर्व के साथ लिया जाता है।
सभी कारगिल शहीदों ने जान की बाजी लगाकर न केवल दुश्मनों को धूल चटाई थी, बल्कि रणक्षेत्र में उन्हें मार गिराने में भी कामयाब हुए थे। इनकी स्मृति में हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। कारगिल शहीद आज भी जिलेवासियों के दिलों में धड़कते रहते हैं। हर साल विजय दिवस हम जनपद के शहीदों को नमन करना नहीं भूलते।
देवकली विकासखंड अंतर्गत धनईपुर निवासी कारगिल शहीद संजय सिंह यादव की शहादत के बाद सरकार ने कई वादे किए, लेकिन उसे निभाने में हीलाहवाली होती रही। सरकारी सिस्टम में कदम-कदम पर भ्रष्टाचार और कमियों के कारण हम सालों इससे जूझते रहे, लेकिन न्याय नहीं मिला। यह बात शहीद की पत्नी राधिका देवी ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि चंद दिनों तक सेना, सरकारी अफसर, जनप्रतिनिधि एवं समाज की संवेदना जुड़ी रही, फिर सभी ने संघर्ष करने को अकेले छोड़ दिया।
उद्यान का सुंदरीकरण तक नहीं हुआ
मुहम्मदाबाद के कारगिल शहीद रामदुलार यादव की पत्नी प्रमिला यादव का कहना है कि शहीद के नाम पर गांव का समुचित विकास नहीं हुआ। शहीद उद्यान ग्रामीणों के सहयोग से जरूर तैयार हुआ, लेकिन यहां तक जाने के लिए आज भी रास्ते का निर्माण नहीं कराया जा सका है। उद्यान का सुंदरीकरण तक नहीं हुआ है। गाजीपुर-बलिया मार्ग पर रघुबरगंज में शहीद के नाम पर एक पेट्रोल पंप जरूर स्थापित है। लेकिन अन्य वादे पूरे नहीं हुए। पुत्र की नौकरी के लिए शहीद परिवार सालों सरकारी दफ्तरों की खाक छानता रहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।