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महिलाओं के विश्वास का पर्व है हरतालिका तीज, यह है पूजा का सही मुहूर्त
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Thu, 24 Aug 2017 05:26 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
हरतालिका तीज यानी वो दिन जब सुहाग की लंबी उम्र के लिए की जाती है पूजा। निर्जल व्रत रख मांगी जाती है सुहाग की लंबी उम्र की कामना और मांगा जाता है सुख समृद्धि का आशीर्वाद। इस व्रत को कुंवारी कन्याए अपने लिए मनचाहे पति पाने और विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य पाने के लिए करती है। यह व्रत बड़ी ही विधि-विधान से किया जाता है। इस बार हरतालिका तीज 24 अगस्त, गुरुवार को है। आगे की स्लाइड्स में पढें..
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- फोटो : अमर उजाला
बुधवार को मिर्जापुर में हरतालिका तीज पर्व के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस प्रकार के आयोजन जनमानस में उर्जा का संचार करते हैं। तीज का त्यौहार महिलाओं के आस्था व विश्वास का पर्व है।
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- फोटो : अमर उजाला
हरितालिका दो शब्दों से बना है, हरित और तालिका। हरित का अर्थ है हरण करना और तालिका अर्थात सखी। यह पर्व भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को मनाया जाता। जिस कारण इसे तीज कहते है। इस व्रत को हरितालिका इसलिए कहा जाता है, क्योंकि पार्वती की सखी (मित्र) उन्हें पिता के घर से हरण कर जंगल में ले गई थी।
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- फोटो : अमर उजाला
चूंकि ये व्रत महिलाओं के सुहाग से जुड़ा है, इसलिए इस दिन महिलाएं खास तौर पर सजती संवरती हैं। इस सोलह शृंगार की सभी चीजें नईं होती हैं। यूं तो हरितालिका तीज का व्रत हर सुहागिन के लिए खास होता है लेकिन पहली बार तीज का व्रत रखने वाली सुहागिनें इसे लेकर खासा उत्साहित हैं। वाराणसी के मार्केट में साड़ी, चूड़ी, बिंदिया, पायल, बिछिया से लेकर साज शृंगार की खरीदारी खूब हुई।
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हरितालिका तीज के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती है। इस दिन शंकर-पार्वती की बालू या मिट्टी की मूति बनाकर पूजन किया जाता है। घर को स्वच्छ करके तोरण-मंडप आदि सजाया जाता है। एक पवित्र चौकी पर शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिलिंग, रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश, पार्वती व उनकी सखी की आकृति बनायें। तत्पश्चात देवताओं का आवाहन कर षोडशोपचार पूजन करें। इस व्रत का पूजन पूरी रात भर चलता है।